सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करने का आग्रह

NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के राज्य के दर्जे की बहाली में हो रही देरी पर पांच प्रमुख हस्तियों ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बी.आर. गवई को खुला पत्र लिखकर स्वत: संज्ञान लेने और मुद्दे पर सुनवाई के लिए विशेष पीठ गठित करने का आग्रह किया है। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव गोपाल पिल्लई, जम्मू-कश्मीर के लिए वार्ताकार समूह की पूर्व सदस्य राधा कुमार, भारतीय सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल अशोक के मेहता, भारतीय वायुसेना के सेवानिवृत्त एयर वाइस मार्शल कपिल काक और अंतर-राज्यीय परिषद के पूर्व सचिव अमिताभ पांडे शामिल हैं।
इन सभी ने सामूहिक पत्र में लिखा है, राज्य का दर्जा समाप्त कर दो केंद्र शासित प्रदेशों में बदलना संविधान के खिलाफ है। भारत एक संघीय लोकतंत्र है, जहां राज्यों के अधिकारों की रक्षा होनी चाहिए। इसीलिए हम आपसे अनुरोध करते हैं कि आप पत्र का स्वत: संज्ञान लें और इस मुद्दे की सुनवाई के लिए एक पीठ गठित करें ताकि राज्य का दर्जा बहाल हो सके और भविष्य में किसी राज्य का दर्जा खत्म न हो सके। उन्होंने केंद्र सरकार पर आरोप लगाकर कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने नवंबर 2019 में संसद में राज्य का दर्जा शीघ्र बहाल करने का वादा किया था जो अब तक अधूरा है।
पत्र में बताया गया कि दिसंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट के सामने सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि राज्य का दर्जा चरणबद्ध तरीके से बहाल होगा। इस पर पत्र में कहा गया, “यह नीति ही उस संवैधानिक तर्क को नकारती है कि किसी राज्य को पूरी तरह से केंद्र शासित प्रदेश में बदला नहीं जा सकता। अगर यह असंवैधानिक था, तब राज्य का दर्जा पूरी तरह से बहाल किया जाना चाहिए। पत्र में चेतावनी दी गई कि केंद्र अप्रैल में हुए पहलगाम आतंकी हमले का हवाला देकर बहाली में देरी को जायज ठहरा सकती है, जबकि हकीकत में यह बहाली का बिल्कुल उचित समय है। उन्होंने लिखा, अक्टूबर 2024 में हुए विधानसभा चुनावों में भारी मतदान और क्षेत्रीय पार्टी नेशनल कॉन्फ्रेंस को मिली स्पष्ट बहुमत ने स्पष्ट किया है कि जनता ने एक चुनी हुई मजबूत सरकार को वोट दिया है।”
उन्होंने बताया कि नई विधानसभा ने पहली बैठक में ही राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए प्रस्ताव पारित किया और राज्यपाल मनोज सिन्हा के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा गया, लेकिन 8 महीने बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। पत्र में पहलगाम हमले के बाद कश्मीरियों के खिलाफ की गई कार्रवाइयों पर चिंता जाहिर किया गया।

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