वेबवार्ता. खबरिया न्यूज. एनसीआर टुडे. नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को पाकिस्तान फिर चेतावनी दी कि अब आतंकवादियों के माध्यम से ‘प्रॉक्सी वार’ (छद्म युद्ध) नहीं चलेगा और ऐसा हुआ तो घर में घुसकर कार्रवाई की जायेगी।
प्रधानमंत्री ने यहां लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की तीन सौवीं जयंती के अवसर पर आयोजित महिला सशक्तिकरण महासम्मेलन में अपने संबोधन में कहा,“ अब आतंकवादियों के जरिए प्रॉक्सी वार (छद्म युद्ध) नहीं चलेगा। ऐसा होने पर अब घर में घुसकर भी मारेंगे और जो आतंकवादियों की मदद करेगा, उसको भी इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। ”
उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक भारतीय कह रहा है और उनकी भावनाओं के अनुरूप अब यदि वह “गोली” चलाएंगे, तो इसका जवाब “गोले” से दिया जायेगा।
श्री मोदी ने कहा कि सरकार देश में विकास के साथ विरासत को साथ लेकर चल रही है। इसके अलावा हमें सुरक्षा, सामर्थ्य और संस्कृति पर ध्यान देना होगा। उन्होंने अपने 40 मिनट के संबोधन को मुख्य रूप से महिलाओं के शौर्य पर केंद्रित रखा और साथ ही हाल में संपन्न ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। इस अवसर पर राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा भी मौजूद थे।
प्रधानमंत्री ने इसी कार्यक्रम के मंच से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से इंदौर मेट्रो रेल सेवा का लोकार्पण किया। इसके अलावा उन्होंने सतना और दतिया हवाईअड्डे का भी लोकार्पण किया। उन्होंने अहिल्याबाई होलकर की स्मृति में डाक टिकट और 300 रुपये का सिक्का जारी किया।
उन्होंने कहा कि पहलगाम में आतंकवादियों ने सिर्फ भारतीयों का ही खून नहीं बहाया। उन्होंने कहा,“ हमारी संस्कृति पर भी प्रहार किया है। हमारे समाज को बांटने की कोशिश की है।” उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने भारत की नारी शक्ति को चुनौती दी है। ये चुनौती आतंकवादी और उनके आकाओं के लिए “काल” बन गयी है। इस हमले के बाद भारत की कार्रवाई ‘ऑपरेशन सिंदूर’ आतंकवादियों के खिलाफ देश का अब तक का सबसे बड़ा और सफल ऑपरेशन है।
श्री मोदी ने कहा, “ पाकिस्तान की सेना ने सोचा भी नहीं होगा, वहां आतंकवादी ठिकानों को हमारी सेना ने मिट्टी में मिला दिया। सैकड़ों किलोमीटर दूर तक।”
उन्होंने कहा, “ साथियों ऑपरेशन सिंदूर हमारी नारी शक्ति के सामर्थ्य का भी प्रतीक बना है। बीएसएफ की ऑपरेशन में बड़ी भूमिका रही है। बीएसएफ की बेटियां सीमाओं पर मोर्चा संभाल रही थीं। सीमा पार से ही रही फायरिंग का मुंह तोड़ जवाब उन्होंने दिया। वीर बेटियों ने अदभुत शौर्य दिखाया है।”
श्री मोदी ने कहा कि भारत संस्कृति और संस्कारों का देश है। सिंदूर नारी शक्ति का प्रतीक है। रामभक्ति में लगे हनुमान भी सिंदूर को ही धारण किए हैं। हम शक्ति पूजा में सिंदूर को अर्पण करते हैं। ये ही अब भारत के शौर्य का प्रतीक बन गया है।
उन्होंने कहा, “ राष्ट्र रक्षा में भारत की बेटियों का सामर्थ्य दिख रहा है। इसके लिए भी बीते दशक में सरकार ने अनेक कदम उठाये। स्कूल से लेकर युद्ध के मैदान तक, देश बेटियों के शौर्य पर अभूतपूर्व भरोसा कर रहा है। पहले एनसीसी में सिर्फ 25 प्रतिशत कैडेट बेटियां होती थीं लेकिन आज 50 प्रतिशत तक हैं।”
उन्होंने कहा कि कल के दिन देश में एक और इतिहास बना है। नेशनल डिफेंस अकादमी (एनडीए) में महिला कैडेट का पहला बैच पास आउट हुआ है। अब सेना, नौसेना और वायुसेना में बेटियां अग्रिम मोर्चे पर तैनात हो रही हैं। फाइटर प्लेन से लेकर आईएनएस विक्रांत तक महिलायें जाबांजी दिखा रही हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि नौसेना की दो बेटियों ने करीब 250 दिनों की समुद्री यात्रा पूरी की और धरती का चक्कर लगाया। हजारों किलोमीटर की यात्रा ऐसी नाव से की, जो मोटर से नहीं, बल्कि हवा से चलती है। उन दो बेटियाें ने हर मुसीबत को हराया है। इसने बता दिया है कि चुनौती कितनी भी बड़ी हो, भारत की बेटियां उस पर विजय पा सकती हैं। नक्सलियों के खिलाफ अभियान हो या सीमापार आतंकवाद हो, हमारी बेटियां भारत की सुरक्षा की ढाल बन रही हैं।
श्री मोदी ने देश के विकास के लिए विरासत को भी सहेजे जाने पर जोर देते हुए कहा कि देवी अहिल्याबाई होलकर से प्रेरणा पाकर आज का भारत भी विकास और विरासत को साथ लेकर चल रहा है। उन्होंने कहा कि देवी अहिल्याबाई को सामाजिक सुधारों के लिए याद रखा जाएगा। अब अगर बेटियों की शादी की उम्र की चर्चा हो तो कुछ लोगों को ‘सेक्युलरिज्म’ पर खतरा दिखने लगता है, पर देवी अहिल्या उस समय बेटियों की शादी की उम्र के बारे में सोचतीं थीं। उन्होंने इन सब समाज सुधार कार्यों को समर्थन दिया। उन्होंने मालवा की सेना में महिलाओं की विशेष टुकड़ी बनाई। पश्चिम की दुनिया को पता नहीं है, माताओं-बहनों के अधिकारों के नाम पर वे हमें कोसते हैं, पर ढाई सौ साल पहले सेना में महिलाओं का होना, ये बहुत बड़ा कदम था। देवी अहिल्याबाई ने नारी सुरक्षा टोलियां बनाईं। माता अहिल्याबाई राष्ट्रनिर्माण में नारी शक्ति के अमूल्य योगदान का प्रतीक हैं। वे समाज में इतना बड़ा परिवर्तन लाने वाली थीं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देवी अहिल्या कहती थीं कि शासन का सही अर्थ जनता की सेवा करना और नागरिकों के जीवन में सुधार लाना होता है। उनकी इसी सोच को आगे बढ़ाना है। आज इंदौर मेट्रो की शुरुआत हुई है। दतिया और सतना भी हवाईसेवा से जुड़ गए हैं। ये सभी परियोजनायें यहां सुविधा बढ़ाएंगी। इनसे विकास और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। देवी अहिल्या प्रतीक हैं कि इच्छाशक्ति और दृढ़प्रतिज्ञा होती है तो विपरीत परिस्थितियां हों, तो भी परिणाम ला सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अहिल्याबाई ने प्रभुसेवा और जनसेवा को कभी अलग नहीं माना। वह हमेशा शिवलिंग साथ लेकर चलती थीं। चुनौतीपूर्ण कालखंड में एक राज्य का नेतृत्व कांटों से भरा ताज था। अहिल्याबाई होलकर ने अपने राज्य की समृद्धि को नई दिशा दी। गरीब से गरीब को भी समृद्ध बनाया। वह भारत की विरासत की बहुत बड़ी संरक्षक थीं। जब हमारे मंदिरों और तीर्थक्षेत्रों पर हमले हो रहे थे, तब उन्होंने उन्हें संरक्षित रखने का बीड़ा उठाया। काशी विश्वनाथ समेत पूरे देश में अनेक मंदिरों का दोबारा निर्माण कराया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस काशी में लोकमाता अहिल्याबाई ने विकास के इतने काम किये, उस काशी ने उन्हें भी सेवा का अवसर दिया। काशी में देवी अहिल्याबाई की मूर्ति लगवायी गयी है। सुशासन का जो मॉडल उन्होंने अपनाया, उसमें गरीबों और वंचितों को सर्वाधिक प्राथमिकता दी।
श्री मोदी ने कहा कि देवी अहिल्या ने जल संरक्षण के कई कार्य किये। किसानों की आय बढ़ाने के लिए कपास और मसालों की खेती को प्रोत्साहित किया। वह हुनर की पारखी थीं। वह जूनागढ़ से कुछ परिवारों को महेश्वर लाईं और उनको साथ लाकर महेश्वर की साड़ी का काम कराया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देवी अहिल्या का प्रेरक कथन है, उसका भाव जो कुछ भी हमें मिला है, वह जनता द्वारा दिया ऋण है, जिसे हमें चुकाना है। सरकार इन्हीं मूल्यों पर चल कर काम कर रही है। सरकार की हर बड़ी योजना के केंद्र में मातायें बहनें हैं।
उन्होंने कहा कि देवी अहिल्या ने अपने शासनकाल में विकास कार्यों के साथ विरासत को भी सहेजा। आज का भारत भी विकास और विरासत दोनों को साथ लेकर चल रहा है।
श्री मोदी ने महिला सामर्थ्य और शौर्य के अनेक उदाहरणों का जिक्र करते हुए कहा, “ वर्तमान में देश, इतिहास के उस मोड़ पर है, जहां हमें सुरक्षा, सामर्थ्य और संस्कृति के प्रत्येक स्तर पर कार्य करना है और इस कार्य में महिला-बेटियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी।”
प्रधानमंत्री ने देवी अहिल्याबाई, रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, रानी कमलापति, रानी अवंतीबाई लोधी, सावित्री बाई फुले और अन्य महान स्त्रियों का नाम लेते हुए कहा कि इनके नाम और काम हमें गौरव से भर देते हैं।
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