NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को देश और विदेश में लाखों लोगों के लिए एक जीवंत प्रेरणा बताते हुए कहा कि वह अपने आचरण से लोगों को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करते हैं।
श्री राधाकृष्णन ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के चुनिंदा भाषणों वाले दो खंडों का विमोचन करने के बाद कहा कि ये दोनों खंड प्रधानमंत्री के राष्ट्र के प्रति योगदान, दृष्टिकोण और सपनों को समझने की कुंजी हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को “देश और विदेश में लाखों लोगों के लिए एक जीवंत प्रेरणा बताया, जो अपने आचरण से लोगों को अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए प्रेरित करते हैं। वह एक आम आदमी के प्रतिनिधि से एक सच्चे जननेता के रूप में विकसित हुए हैं जिनके दृढ़ संकल्प ने हमें दिखाया है कि कैसे असंभव को संभव बनाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का हर भाषण दृढ़ता, दृढ़ संकल्प और जन कल्याण का एक ही संदेश देता है। प्रधानमंत्री के भाषण उस दृष्टिकोण को दर्शाते हैं जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सरकारी योजनाएँ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने एक भारत श्रेष्ठ भारत, काशी तमिल संगम, जनजातीय गौरव दिवस और राजपथ का नाम बदलकर कर्तव्य पथ रखने जैसी पहलों के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक पहचान मजबूत किया है। उन्होंने स्टार्टअप इंडिया, फिट इंडिया, खेलो इंडिया, स्किल इंडिया और रोज़गार मेलों जैसी पहलों की प्रशंसा करते हुए इन्हें 2047 तक एक विकसित भारत के निर्माण के लिए आधारभूत स्तंभ बताया।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के भाषणों में में वैश्विक एजेंडा को आकार देने से लेकर वोकल फॉर लोकल, आत्मनिर्भर भारत और पीएम-सूर्य घर के अलावा मुफ्त बिजली योजना जैसी परिवर्तनकारी पहलों को आगे बढ़ाना शामिल है। उन्होंने बताया कि कैसे ये कार्यक्रम सतत विकास लक्ष्यों को दर्शाते हैं और लोगों के जीवन में ठोस बदलाव लाते हैं।
उन्होंने कहा कि जन धन योजना, आधार-मोबाइल लिंकेज, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी), पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, लखपति दीदी, किसानों के लिए पीएम-किसान, मुद्रा योजना और पीएम स्वनिधि जैसी पहलों के माध्यम से पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि जनता की सामूहिक क्षमता में प्रधानमंत्री के अटूट विश्वास ने स्वच्छ भारत अभियान को जनभागीदारी के एक जन आंदोलन में बदल दिया और नागरिकों में “स्वच्छता ही सेवा है” की भावना का संचार किया। उन्होंने कहा कि इसी विश्वास ने प्रधानमंत्री को कोविड संकट के दौरान भारत को आत्मनिर्भरता के पथ पर दृढ़ता से आगे बढ़ाने का साहस दिया।
उन्होंने कहा कि एक दशक पहले, भारत को नाज़ुक अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता था। आज, भारत गर्व से दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित हुआ है और जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह केवल एक आर्थिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय अनुशासन, आत्मनिर्भरता और “राष्ट्र प्रथम” की भावना का परिणाम है जो देश की विकास यात्रा का मार्गदर्शन करती है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह प्रसन्नता की बात है कि विकसित भारत का सपना हर नागरिक की आंखों में चमक रहा है और राष्ट्र प्रथम का सिद्धांत हर नागरिक के दिल में गूंज रहा है।