NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि उसने कर्नाटक एमयूडीए से जुड़ी धन शोधन जांच के सिलसिले में 40 करोड़ रुपये की संपत्तियां कुर्क की हैं।
अधिकारियों ने बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत चार अक्टूबर को 34 अचल संपत्तियों को कुर्क करने का अनंतिम आदेश जारी किया गया था, जिसमें एमयूडीए (मैसूर शहरी विकास प्राधिकरण) के कुछ भूखंड भी शामिल हैं।
संघीय जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि इन संपत्तियों का बाजार मूल्य 40.08 करोड़ रुपये है।
धन शोधन का यह मामला कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस की एक प्राथमिकी से जुड़ा है।
ईडी ने पहले भी संपत्ति कुर्क करने के इसी तरह के आदेश जारी किए थे और इस नई कार्रवाई के साथ ही अब तक इस जांच के तहत 400 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।
ईडी ने सितंबर में पूर्व एमयूडीए आयुक्त जीटी दिनेश कुमार को गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में हैं। एजेंसी ने कहा कि उसकी जांच में कुमार द्वारा ‘अनुचित रिश्वत’ प्राप्त करने के कई सबूत पाए गए हैं।
ईडी ने आरोप लगाया, ‘अपराध की ऐसी आय का इस्तेमाल जी टी दिनेश कुमार के रिश्तेदारों/सहयोगियों के नाम पर अचल संपत्तियां खरीदने के लिए किया गया। जांच में कुमार द्वारा एमयूडीए के 31 भूखंडों के अवैध आवंटन का भी पता लगा।’
ईडी ने दावा किया कि एमयूडीए अधिकारियों और रियल एस्टेट कारोबारियों के बीच ‘गहरी’ सांठगांठ थी और ‘साक्ष्य’ से पता चलता है कि मुआवजे के रूप में भूखंडों के आवंटन और भूखंडों की मंजूरी के लिए नकद भुगतान किया गया था।
एमयूडीए मामला कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की पत्नी पार्वती को आवंटित भूमि में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
हालांकि, जुलाई में उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में पार्वती के खिलाफ ईडी की कार्यवाही को रद्द करने के कर्नाटक उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था।
इस मामले में राज्य सरकार द्वारा गठित न्यायमूर्ति पी एन देसाई आयोग ने भी सिद्धरमैया और उनके परिवार को दोषमुक्त करार दिया है। लोकायुक्त पुलिस ने भी सिद्धरमैया, पार्वती और दो अन्य को ‘क्लीन चिट’ देते हुए कहा है कि आरोप ‘सबूतों के अभाव में साबित नहीं हो सके।’

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