NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश के जल परिवहन तंत्र में हो रहे बदलाव की सराहना करते हुए कहा कि भारत की नदियां आज केवल विरासत का प्रतीक नहीं, बल्कि प्रगति के मुख्य माध्यम बन गई हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर केंद्रीय मंत्री सर्वानंद सोनोवाल के जलमार्गों पर लिखे लेख को साझा करते हुए यह टिप्पणी की। प्रधानमंत्री ने लिखा, “भारत की नदियां केवल विरासत का प्रतीक नहीं हैं, वे प्रगति के राजमार्ग हैं। पुनर्जीवित जलमार्गों के लिए केंद्रीय मंत्री सोनोवाल के दृष्टिकोण और विकसित भारत की ओर उनके योगदान को जानना महत्त्वपूर्ण है।”
केंद्रीय मंत्री सोनोवाल ने अपने लेख में कहा कि एक समय था जब भारतीय नदियां मालवहन का मुख्य स्रोत थीं, पर रेल और सड़कों के आगमन के बाद उनका महत्व कम होता गया। अब सरकार इंटरनल वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (आईडब्लूएआई) के सहयोग से नदियों का पुनर्जीवन कर रही है। मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2014 तक केवल 5 राष्ट्रीय जलमार्ग थे, वहीं आज 111 को राष्ट्रीय जलमार्गों का दर्जा दिया गया है, जिनमें से 32 चालू हैं। यह परिवर्तन केवल संख्यात्मक नहीं बल्कि लॉजिस्टिक्स दर्शन और कनेक्टिविटी के व्यापक विस्तार का प्रतीक है।
लेख में स्पष्ट किया गया है कि जलमार्गों द्वारा परिवहन से ईंधन व उत्सर्जन कम होता है तथा यह आर्थिक दृष्टि से अधिक लाभकारी है। 2013-14 में माल ढुलाई 18 मिलियन टन थी जो 2024-25 तक 145 मिलियन टन तक पहुंच गई है। सरकार ने 2030 तक 200 मिलियन टन तथा 2047 तक 250 मिलियन टन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सोनोवाल ने आगे कहा कि नदी पर्यटन भी तेज़ी से बढ़ रहा है। जहां एक दशक पहले केवल पांच क्रूज़ चालू थे, अब 13 जलमार्गों पर 25 से अधिक क्रूज़ जहाज संचालन में हैं। गंगा, ब्रह्मपुत्र एवं केरल के बैकवाटर्स में पर्यटन गतिविधियों में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। आधुनिक टर्मिनलों, इलेक्ट्रिक शोर लिंक व चौबीस घंटे नेविगेशन जैसी सुविधाओं से यह उम्मीद की जा रही है कि नदी मार्ग पर आवागमन सुरक्षित, आरामदायक और टिकाऊ बनेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने नदियों के संरक्षण और उनके योजनाबद्ध विकास पर प्रशासनिक प्रतिबद्धता जताते हुए कहा कि “हमें बस नदी का सम्मान करना है – समझदारी से ड्रेजिंग करनी है, उसे सुरक्षित दिशा में आगे बढ़ाना है तथा उसे नवजीवन देना है।” इस कार्य से न केवल परिवहन, पर्यटन व व्यापार को नई गति मिल रही है, बल्कि नदी सभ्यता की विरासत भी सुरक्षित हो रही है।