NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। कांग्रेस ने महाराष्ट्र में महिला डॉक्टर की आत्महत्या के मामले में राज्य सरकार पर आरोपियों को बचाने का आरोप लगाते हुए इसकी विशेष जांच दल-एसआईटी से जांच कराने की मांग की और कहा कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस बिना जांच के आरोपियों को क्लीन चिट दे रहे हैं इसके लिए उन्हें माफी मांगनी चाहिए।
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष तथा सांसद वर्षा गायकवाड़ और महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अतुल लोढ़े पाटिल ने गुरुवार को यहां पार्टी मुख्यालय में संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आत्महत्या करने वाली महिला डाक्टर ईमानदार थीं और राजनीतिक दबाव और तंत्र की विफलता से वह अंत समय तक जंग लड़ती रही। उन्होंने कहा कि महिला डॉक्टर पर शुगर मिल के मजदूरों के फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाने के लिए राजनीतिक दबाव डाला जा रहा था और वह जमकर इसका विरोध करती रहीं। उन्हें धमकाया गया लेकिन वह नहीं मानी और अंतत: परेशान होकर उन्होंने तंत्र के सामने अपनी हार मान ली और 22 अक्टूबर को एक होनहार ईमानदार महिला डाक्टर ने आत्महत्या कर ली।
उन्होंने कहा कि महिला डॉक्टर को ब्लैकमेल किया जा रहा था। इससे तंग आकर उन्होंने अपने वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस से भी इसकी शिकायत की लेकिन पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। महिला डॉक्टर अपनी आपबीती आत्महत्या नोट में लिखना चाहती थीं लेकिन उनसे आखिरी क्षणों में कागज़ छीन लिए गए तो फिर उन्होंने सुसाइड नोट अपने हाथ पर लिखा और महाराष्ट्र ने अपनी इस होनहार ईमानदार बेटी को खो दिया।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि इस मामले में राज्य सरकार आरोपियों का बचाव कर रही है। उनका कहना था कि जब महिला डॉक्टर के सुसाइड नोट में आरोपियों के नाम लिखे हुए हैं तो उनको तत्काल गिरफ्तार किया जाना चाहिए था लेकिन आश्चर्य इस बात का है कि खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पीड़ित परिवार को वित्तीय सहायता देने की बजाय बिना जांच के आरोपियों को ‘क्लीन चिट’ दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि श्री फडणवीस को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में महिला अपराध, अत्याचार चरम पर है और जब भी किसी ने सच की लड़ाई लड़ी तो उसे सिस्टम ने विफल किया। महिला डॉक्टर के साथ भी यही हुआ जो साबित करता है कि महाराष्ट्र में कानून व्यवस्था ध्वस्त है। वहां रक्षक ही भक्षक बन रहे हैं और इस तरह से इस मामले में साबित कर दिया है कि महाराष्ट्र के हालात बहुत खराब हैं।

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