NCR TODAY. Khabariya. Noida। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जेपी समूह के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ को मनी लॉन्डिंग के एक बड़े मामले में गिरफ्तार किया है। एजेंसी घर खरीदारों द्वारा जमा कराए गए लगभग 14,599 करोड़ रुपये की उस रकम की गहन पड़ताल कर रही है। जिसे परियोजनाओं में लगाने के बजाय कथित रूप से दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया. शुरू में यह जांच 12 हजार करोड़ से शुरू हुई, अब यह 15000 हजार करोड़ के करीब पहुंचती हुई नजर आ रही है.
नोएडा के सेक्टर 128 स्थित जेपी समूह के कार्यालय पर सन्नाटा छाया हुआ है। वही खरीदारों की सांस अटकी हुई है, क्योंकि वर्षो पुरानी उम्मीदें और अधूरी इमारतें एक बार फिर जांच के केंद्र में है। जेपी समूह के पूर्व कार्यकारी अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक मनोज गौड़ की मनी लांड्रिंग के मामले में हुई गिरफ्तारी खरीदारों और निवेशकों के 12000 करोड़ के कथित फोंट डायवर्सन की शिकायतों के आधार पर की गई है।
ईडी की जांच का केंद्र बिंदु फंड में हेराफेरी का है आरोप है कि जीपी समूह ने घर खरीदारों से जुटाए गई राशि को आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने के बजाय अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किया और जेपी समूह से संबंधित कंपनियों और ट्रस्टों में ट्रांसफर किया गया. जिससे हजारों खरीदारों को समय से फ्लैट नहीं मिले। जेपी समूह ने खरीदारों के साथ धोखाधड़ी आपराधिक साजिश और आपराधिक विश्वासघात किया।
ईडी की है जांच दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा द्वारा दर्ज की गई एफआईआर पर दर्ज है। जो मुख्य रूप से जेपी विश टाउन जैसी परियोजनाओं से जुड़ा हुआ है। प्रारंभिक जांच से यह भी खुलासा हुआ है कि 14599 करोड रुपए की बड़ी धनराशि को जेपी संस्थान की संस्थाओं में भेजा गया जिसमें मनोज गौड़ की भूमिका अहम बताई जा रही है। ईडी इस विशाल फंड डायवर्सन के जटिल नेटवर्क को आगे की जांच करने के लिए मनोज गोद को मनी लांड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया है।