NEW DELHI, 29 JAN (UNI):- Chief Economic Advisor to the Government of India Dr. V. Anantha Nageswaran with others during the presentation of the Economic Survey of India 2025–26 at the National Media Centre in New Delhi on Thursday. UNI PHOTO RD17U- RANJAN DIMRI

NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक सर्वेक्षण में रेल यात्री किराये और बिजली दरों में क्रॉस सब्सिडी को “अनसुलझा मुद्दा” बताते हुए चरणबद्ध तरीके से इन्हें “युक्तिसंगत बनाने” की सिफारिश की गयी है। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि रेलवे यात्री किराया कम रखकर उसमें हुए घाटे की भरपाई माल ढुलाई से प्राप्त राजस्व से करता है।
इससे रेलवे की माल ढुलाई महंगी होती है और अन्य माध्यमों की तुलना में उसकी प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता कम होती है। इसी प्रकार, घरेलू उपभोक्ताओं को बिजली कम दर पर उपलब्ध कराने के लिए उद्योगों को ज्यादा दर में बिजली की आपूर्ति की जाती है। इससे उद्योगों की लगात बढ़ जाती है। सरकार को सलाह दी गयी है कि भविष्य में एक संतुलित उपाय के तहत “सब्सिडी प्राप्त श्रेणियों के लिए चरणबद्ध दर और कोटा का प्रावधान करके दरों को युक्तिसंगत” बनाया जा सकता है। साथ ही स्वैच्छिक आधार पर और कुछ वर्ग विशेष को सब्सिडी से बाहर रखा जा सकता है।

वर्ष 2022-23 में रेलवे को किराये से प्राप्त कुल राजस्व में 68 प्रतिशत योगदान

इसमें बताया गया है कि वित्त वर्ष 2022-23 में रेलवे को किराये से प्राप्त कुल राजस्व में 68 प्रतिशत योगदान माल ढुलाई का रहा। माल ढुलाई से प्राप्त लाभ का इस्तेमाल यात्री किराये और अन्य सेवाओं से हुए नुकसान की भरपाई के लिए किया गया। इसके बावजूद, यात्री परिवहन के 5,257 करोड़ रुपये के नुकसान की भरपाई नहीं हो सकी। कैग ने भी यात्री परिवहन की लागत के विश्लेषण और नुकसान कम करने के उपाय करने का सुझाव दिया है।
सर्वेक्षण में बताया गया है कि 01 जनवरी 2020, 01 जुलाई 2020 और 26 दिसंबर 2025 को यात्री किराये में संशोधन से पांच साल में रेलवे के कुल किराये में माल ढुलाई की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2022-23 के 68 प्रतिशत से घटकर 2024-25 में 65 प्रतिशत रह गया। इसके वित्त वर्ष 2025-26 में 62 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
इसमें कहा गया है कि क्रॉस सब्सिडी के कारण सड़क परिवहन के साथ प्रतिस्पर्धा में रेलवे पीछे रह जाता है, कमोडिटी के सामान और उपभोक्ता उत्पादों की कीमत तथा लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ती है। माल ढुलाई की दरों में सुधार से राजस्व बढ़ सकता है और लोग अपना माल भेजने के लिए सड़क मार्ग से रेल मार्ग की तरफ आकर्षित हो सकते हैं।
इससे आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, परिवहन क्षेत्र पर्यावरण के ज्यादा अनुकूल बनेगा और सड़क पर यातायात का बोझ कम होगा। बिजली क्षेत्र के बारे में कहा गया है कि घरेलू उपभोक्ताओं और किसानों को कम दर पर बिजली देने के लिए उद्योगों को महंगी बिजली दी जाती है। टैरिफ नीति के विपरीत कुछ राज्यों में बजली की दर के मुकाबले औसत आपूर्ति लागत का अंतर 20 प्रतिशत से भी ज्यादा है।
बिजली (संशोधन) विधेयक, 2025 में लागत के अनुरूप बिजली की दर को बढ़ावा देने और औद्योगिक उपभोक्ताओं के साथ सीधे खरीद अनुबंध का प्रावधान किया गया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि विनिर्माण इकाइयों, रेलवे और मेट्रो रेलवे द्वारा क्रॉस सब्सिडी का भुगतान पांच साल में पूरी तरह समाप्त किया जाना चाहिये।
इसमें बताया गया है कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) ढांचे में सुधार से पिछले एक दशक में 3.48 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान रोकने का अनुमान है।

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