NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। रेल मंत्रालय ने उत्तर रेलवे के तहत सिग्नलिंग प्रणाली के आधुनिकीकरण के लिए 421.41 करोड़ रुपये की दो महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की। इनका उद्देश्य हाई डेंसिटी नेटवर्क (एचडीएन) और हाईली यूज्ड नेटवर्क (एचयूएन) मार्गों पर रेल संरक्षा को और मजबूत करना तथा परिचालन दक्षता में वृद्धि करना है।
स्वीकृत परियोजनाओं के अंतर्गत दिल्ली और अंबाला मंडल के कुल 34 स्टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली स्थापित की जाएगी। यह कार्य उन स्टेशनों पर किया जाएगा, जहां स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को पहले ही मंजूरी दी जा चुकी है। आधुनिक सिग्नलिंग और कवच तकनीक के समन्वय से व्यस्त रेल मार्गों पर सुरक्षित, सुचारु और उच्च क्षमता वाला ट्रेन संचालन सुनिश्चित होगा।
रेल मंत्रालय के अनुसार दिल्ली मंडल में एचडीएन/एचयूएन मार्गों पर स्थित 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली स्थापित की जाएगी, जिस पर 292.24 करोड़ रुपये की लागत आएगी। वहीं अंबाला मंडल में एचडीएन/एचयूएन मार्गों के 13 स्टेशनों पर यह प्रणाली लगाई जाएगी, जिसकी अनुमानित लागत 129.17 करोड़ रुपये होगी।
इन दोनों परियोजनाओं को उत्तर रेलवे के लिए निर्धारित 1,547 करोड़ रुपये के सब-अम्ब्रेला कार्य के अंतर्गत मंजूरी दी गई है। यह स्वीकृति ‘कार्य, मशीनरी और रोलिंग स्टॉक कार्यक्रम’ के तहत पिंक बुक 2024-25 के बड़े अम्ब्रेला अनुमोदन का हिस्सा है।
इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग प्रणाली को अपनाना रेलवे संरक्षा के क्षेत्र में एक अहम कदम माना जा रहा है। पारंपरिक मैकेनिकल इंटरलॉकिंग की तुलना में ईआई प्रणाली कंप्यूटर आधारित होती है, जो सिग्नल और पॉइंट्स के संचालन को स्वचालित रूप से नियंत्रित करती है। इससे मानवीय भूल की संभावना न्यूनतम हो जाती है और ट्रेन संचालन अधिक सुरक्षित एवं विश्वसनीय बनता है।
रेल मंत्रालय के अनुसार कवच प्रणाली से युक्त मार्गों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग लागू करने से उत्तर रेलवे एक मजबूत, आधुनिक और त्रुटिरहित नेटवर्क की ओर अग्रसर होगा। यह नेटवर्क न केवल यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देगा, बल्कि भविष्य में बढ़ने वाले यातायात दबाव को भी प्रभावी ढंग से संभालने में सक्षम होगा।

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