NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार के केंद्र सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में रखे गए जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को चिकित्सा आधार पर रिहा नहीं किया जा सकता है। केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा कि जहां तक वांगचुक के सेहत का सवाल है तो वह फिट, तंदुरुस्त हैं और चिंता की कोई बात नहीं है। जस्टिस अरविंद कुमार और पीबी वराले की पीठ के समक्ष केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह जानकारी दी। उन्होंने पीठ से कहा कि जिन वजहों से वांगचुक को हिरासत में लेने का आदेश दिया गया था, वे अभी भी जारी हैं और स्वास्थ्य के आधार पर उन्हें रिहा करना मुमकिन नहीं होगा।
मेहता ने पीठ से कहा कि जेल नियमावली के अनुसार वांगचुक की 28 बार मेडिकल जांच की गई है, उन्हें पाचन संबंधी कुछ समस्या हुई थी और इलाज किया जा रहा है। चिंता की कोई बात नहीं है। केंद्र सरकार ने पीठ से कहा कि हमने कोर्ट के उस निर्देश पर गंभीरता से विचार किया, जिसमें स्वास्थ्य के आधार पर हिरासत की समीक्षा करने को कहा गया था। साथ ही कहा काफी विचार करने के बाद यह तय किया गया कि रिहा करना मुमकिन नहीं होगा। सॉलिसिटर जनरल मेहता ने कहा कि प्रिवेंटिव डिटेंशन के मामलों में छूट नहीं दी जा सकती और यह सही भी नहीं है। सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने पीठ से कहा कि वांगचुक हिंसक विरोध प्रदर्शनों में मुख्य भड़काने वाले थे और उन्होंने नेपाल और अरब स्प्रिंग का उदाहरण देकर युवाओं को भड़काया।
नटराज ने पीठ से यह भी कहा कि वांगचुक ने नेपाल में हिंसक आंदोलन का ज़िक्र किया और कहा कि ऐसा ही भारत में भी हो सकता है। इस पर पीठ ने उनसे पूछा कि ‘वह (वांगचुक) ऐसा कहां कहते हैं? वह कह रहे हैं कि उन्होंने (युवाओं ने) इसे आगे बढ़ाया है। वह खुद हैरान हैं।’ इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नटराजन ने कहा कि बयान का मतलब निकाला जाना चाहिए। इसके साथ ही नटराज ने कहा कि वांगचुक कहते हैं कि लद्दाख में सेना की तैनाती दुर्भाग्यपूर्ण है। वह कहते हैं कि युवा कहते हैं कि शांतिपूर्ण तरीके असरदार साबित नहीं हुए हैं। इस पर पीठ ने कहा कि वह (वांगचुक) कह रहे हैं कि युवा ऐसा कह रहे हैं। पूरा वाक्य पढ़ें। वह कह रहे हैं कि यह चिंता की बात है। अगर कोई यह कहता है कि हिंसक तरीका सही तरीका नहीं है। आप बहुत ज्यादा पढ़ रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई कर रही है, जिसमें हिरासत को चुनौती दी गई है।

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