अर्जुन देशप्रेमी/लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं
अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर आठ दिन पहले जो हमला किया है उसका परिणाम पूरी दुनिया के लिए ठीक नहीं है न ही होगा। पर इसका सबसे पहला शिकार पड़ोसी देश पाकिस्तान हुआ है जहाँ आवाम त्राहिमाम करने लगी है। इसका कारण पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लगना है। पर समस्या यहीं नहीं समाप्त हो रही है। पाकिस्तान में हालात यह हैं कि संभव है वहाँ पैसे होने के बाद भी लोगों को पेट्रोल और डीजल या गैस ना मिले क्योंकि वहाँ इनका भंडार ही समाप्त हो जाएगा। समस्या का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि पूरे पाकिस्तान में इसकी किल्लत हो गई है और पेट्रोल पंपों पर भारी भरकम भीड़ जुटी है। लंबी लंबी लाइनें लगी हैं।
पेट्रोल डीजल और गैस के लिए लोग आपस में लड़ रहे हैं। इस बीच सरकार ने पेट्रोल और ‘हाई-स्पीड डीजल’ की कीमत में प्रति लीटर 55 पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोतरी की जो अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है। यह ईरान युद्ध के बाद आर्थिक रूप से बड़े असर को दिखाता है। पाकिस्तान सरकार कितनी बेबस है इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि मात्र आठ दिनों के खाड़ी युद्ध में ही पाकिस्तान के तेल रिजर्व ख़त्म हो रहे हैं और सरकार को कल आधी रात को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके तेल की कीमतों को बढ़ाने का ऐलान करना पड़ा है। वह भी तीन-तीन मंत्रियों को एक साथ आकर बोलना पड़ा जिनमें पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक, उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री इसहाक डार तथा वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगजेब शामिल थे। पर इन्होंने एक तरफ़ भारी भरकम दाम बढ़ाये तो दूसरी तरफ़ यह आश्वासन भी दिया कि देश के पास पेट्रोलियम का पर्याप्त भंडार मौजूद है। अगर पर्याप्त भंडार हैं तो फिर इतनी जल्दी और इतनी भारी मूल्यवृद्धि क्यों करनी पड़ी? इस बढ़ोतरी के बाद ‘हाई-स्पीड डीजल’ की डिपो पूर्व कीमत आने वाले सप्ताह के लिए 335.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तय की गई है, जो पहले 280.86 रुपये प्रति लीटर थी यानी लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसी तरह पेट्रोल की डिपो पूर्व कीमत 266.17 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 321.17 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है, जो लगभग 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी को दर्शाती है। उनका कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने पूरे क्षेत्र में अनिश्चितता पैदा कर दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर असर पड़ा है। एक पड़ोसी देश में लगी आग अब पूरे क्षेत्र में फैल गयी है। हमें नहीं पता कि यह संकट कितने समय तक चलेगा और इसके खत्म होने की कोई स्पष्ट समय सीमा भी नही है।
दरअसल समस्या यह है कि पाकिस्तान तेल आपूर्ति के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले मार्ग पर निर्भर है, जो मौजूदा संघर्ष से प्रभावित हुआ है। उसका ज्यादातर तेल इसी रास्ते से आता है जिसे ईरान ने बंद कर रखा है। साथ ही वह उधार के तेल के लिए सऊदी अरब, ओमान, कतर और संयुक्त अरब अमीरात पर निर्भर है। नक़द में तेल ख़रीदने के लिए उसके पास पैसे नहीं हैं। और ईरान के साथ अमेरिकी युद्ध के कारण इन देशों से जहाँ एक ओर तेल का उत्पादन रुका है, वहीं दूसरी ओर तेल का परिवहन भी रुक गया है। आईएमएफ के कर्जे तले दबे पाकिस्तान की समस्या यह भी है की कोई दूसरा देश उधार में तेल देगा नहीं। साथ ही अब ये देश भी उधार में शायद ही तेल दें। ऐसे में पाकिस्तान की समस्या विकराल होती जा रही है।
पाकिस्तान को जब अपनी अर्थव्यवस्था सुधारने की जरूरत थी, तब तो वह भारत के ख़िलाफ़ आतंकवादियों को पालने पोसने में लगा था। अर्थव्यवस्था में पैसे लगाने की जगह वह आतंकियों के लिए हथियार ख़रीदने और उनको प्रशिक्षित करने में पैसे लगा रहा था। इसी तरह जब तेल रिज़र्व के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने का समय था, तब वह भारत द्वारा तबाह किए गए आतंकियों के आशियाने बनाने में लगा था। ऐसे में उसके पास तेल रिजर्व रखने के लिए ना तो इन्फ़्रा तैयार हुआ न ही तेल ख़रीद कर वह जमा कर पाया। जानकारों के अनुसार उसके पास महज़ हफ़्ते दस दिन का रिज़र्व था जो अब ख़त्म होने की ओर है। जाहिर है अब अचानक जब युद्ध के कारण कच्चे तेल के दाम बढ़े हैं तो उसे अब उन देशों से तेल लेना पड़ेगा जो ऊँचे दामों पर देंगे। साथ ही उन देशों से तेल लाने के खर्च भी ज्यादा होंगे। पाकिस्तान में रिफाइनरियों की कमी के कराण उसे डीजल और पेट्रोल जिन देशों से लेने होंगे, वह भी महंगे पड़ेंगे। भारत उसे तुलनात्मक रूप से सस्ता पेट्रोल और डीजल दे सकता था। भारत से परिवहन लागत भी कम पड़ती। पर आतंकवाद के पोषक पाकिस्तान ने भारत के साथ जिस तरह के संबंध रखें, उसमे अब यह भी संभव नहीं है। सो, पाकिस्तान की समस्या का समाधान भी नहीं दिख रहा है। ऐसे में पाकिस्तान की जनता के लिए पहले से ही चल रहे बुरे दिन अब बदतर दिनों की ओर जा रहे हैं। पेट्रोल डीजल में लगी आग के बाद जिस तरह से पाकिस्तान सरकार ने इनके दाम बढ़ाये हैं, उसमे अब वहाँ महंगाई का अगला दौर शुरू होगा जिससे उसकी अर्थव्यवस्था की कमर और टूटेगी। ऐसे में भिखमंगे देश के रूप में मशहूर पाकिस्तान का क्या होगा यह सहज अनुमान लगाया जा सकता है।
स्वयं पाकिस्तानी मंत्री इसहाक डार ने कहा है कि इस संकट के कारण वैश्विक तेल कीमतों में 50 से 70 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। कई देशों में कीमतें स्वतः बढ़ जाती हैं लेकिन हमने उपभोक्ताओं पर न्यूनतम बोझ डालने और संतुलित समाधान निकालने की कोशिश की है। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की मानें तो यह फैसला उस समय आया जब सरकार ने शुक्रवार को प्रस्तावित राष्ट्रीय कार्य योजना को फिलहाल टाल दिया, जिसमें संभावित ईंधन संकट से निपटने के लिए घर से काम (वर्क फ्रॉम होम) करना और दूरस्थ शिक्षा जैसे उपाय शामिल थे। इसके बजाय कम से कम एक सप्ताह तक सामान्य गतिविधियां जारी रखने का फैसला किया गया। कीमत बढ़ने की घोषणा से पहले कई शहरों में पेट्रोल पंप पर लंबी कतारें लग गईं, क्योंकि वाहन चालक सस्ता ईंधन लेने के लिए अपनी गाड़ियों का टैंक भरवाने पहुंच गए। इससे पहले घर से काम और दूरस्थ शिक्षा जैसी व्यवस्था को टालने का फैसला पेट्रोलियम उत्पादों के भंडार पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की। बैठक में फैसला किया गया कि घर से काम और दूरस्थ शिक्षा की योजना को कम से कम एक सप्ताह के लिए टाल दिया जाए। इसका साफ़ मतलब है कि पाकिस्तान की समस्याएँ जल्दी ही और बढ़ने वाली हैं। अगर जल्दी युद्ध नहीं रुका तो पाकिस्तान में एक के बाद एक पाबंदियाँ लगेंगी।
पाकिस्तान जैसे तैसे उधार लेकर, आईएमएफ से कर्जे लेकर चल रहा था। कर्ज के पैसे से वह पड़ोसी अफ़ग़ानिस्तान से युद्ध भी लड़ रहा है। ऐसे में अब एक और आफत यह है कि सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने उससे अपने पैसे माँग लिए हैं जो अरबों डॉलर में हैं। इसको लेकर दोनों देशों ने अल्टीमेटम भी देना आरम्भ कर दिया है। पर वर्तमान हालत को देखते हुए पाकिस्तान के लिए पैसे चुकाना संभव भी नहीं दिखता है। तो सवाल है कि पाकिस्तान का होगा क्या? साफ़ उत्तर है कि पाकिस्तान एक विफल देश के रूप में सामने आने वाला है जहां की अर्थव्यवस्था के साथ ही व्यवस्थाएँ भी चरमरा सकती हैं जो पड़ोसी देशों, ख़ासकर भारत के लिए भी संकटपूर्ण होगा। पाकिस्तान में बेरोजगारी, भुखमरी, महंगाई, अपराध या गृह युद्ध भारत को भी परेशान करेंगे। पर वर्तमान में भारत के लिए स्थिति पर गंभीर नज़र बनाये रखने के अलावा कुछ और करने की नहीं है। उम्मीद की जानी चाहिए कि पाकिस्तान के विफल होने पर उपजने वाले संभावित ख़तरों के प्रति भारत सरकार और वर्तमान नेतृत्व सजग होगा।