अर्जुन देशप्रेमी

यूँ तो पाकिस्तान और पाकिस्तान से जुड़े लोग अक्सर गीदड़भभकियाँ देते रहते हैं। पा हाल में जो गीदड़ भभकी सामने आयी हैं, वह ना सिर्फ़ कुछ हटकर है, वरन् कई मायनों में हैरान करने वाली ही है। इसके कई निहितार्थ भी हैं। इस बार जो गीदड़ भभकी आयी है, वह उस आदमी ने दी है जो भारत में पाकिस्तान का उच्चायुक्त रहा है। इस आदमी का नाम अब्दुल बासित है जो कभी भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की बातें भी किया करता था। दिल्ली में अब्दुल बासित ने अपने प्रवास के दौरान मुझसे भी कई बार औपचारिक और उनौपचारिक रूप से बातें की थी। तब पाकिस्तान अपने को भारत के मुक़ाबले ना सिर्फ़ आर्थिक रूप से मजबूत बताता था, वरन् मानकर चलता था कि उसकी पकड़ दुनिया के देशों में भारत के मुक़ाबले बेहतर है। ख़ासकर मुस्लिम देशों को तो पाकिस्तान अपना सागा ही मानकर चलता था। अमेरिका उसके ज्यादा करीब था। भारत के मुकाबले पाकिस्तान को ज़्यादा तवज्जो देता था। पर अब स्थितियां काफ़ी कुछ बदल चुकी हैं। भारत आर्थिक सुपर पॉवर बनने की ओर है तो पाकिस्तान कंगाल बना हुआ है। मुस्लिम देशों से कोई ख़ास तवज्जो नहीं मिल रही है जबकि मुस्लिम देशों के भारत से संबंध ठीक ठाक हैं। ऐसे में यही पाकिस्तानी अब कह रहा है कि अमेरिका ने अगर पाकिस्तान पर अटैक किया तो पाकिस्तान भारत को नहीं छोड़ेगा। अब्दुल बासित का कहना है कि अगर इसराइल और अमेरिका ने पाकिस्तान पर हमला किया तो पाकिस्तान भारत के मुंबई और दिल्ली पर अपनी मिसाइलें और बमों से हमला करेगा क्योंकि पाकिस्तान की मिसाइलें और बम अमेरिका तक पहुँच नहीं पाएंगे। ऐसे में पाकिस्तान के लिए भारत पर हमला करने का ही विकल्प है। इसमें परमाणु हमला भी शामिल हो सकता है।
एक लाइव शो के दौरान उन्होंने गीदड़ भभकी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने पाकिस्तान पर हमला किया, तो वे इसका बदला भारत से लेंगे और दिल्ली-मुंबई को 26/11 की तरह दहला देंगे। इस बयान साफ दिखाता है कि पाकिस्तान के बड़े-बड़े अधिकारी भी अब डर के मारे ‘आतंकवादी’ सोच की शरण में चले गए हैं। अब्दुल बासित, जो साल 2014 से 2017 के बीच भारत में पाकिस्तान के हाई कमिश्नर रह चुके हैं, उनकी इस आतंकवादी सोच ने सबको चौंका दिया है। बासित ने डरते हुए कबूल किया कि अमेरिका और इजराइल पाकिस्तान की मिसाइल रेंज से बाहर हैं। यानी वे उन पर हमला करने की औकात नहीं रखते।उन्होंने बेशर्मी से कहा कि जब वे अमेरिका का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे, तो उनके पास भारत के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। बासित की धमकी है कि वे बिना सोचे-समझे भारत के दिल दिल्ली और मायानगरी मुंबई पर हमला करेंगे। उन्होंने अपनी गिरी हुई समझ का प्रदर्शन करते हुए कहा कि ‘हम बंबई से दिल्ली तक जहां दिल चाहेगा मिसाइल गिराएंगे, फिर देखी जाएगी।
बासित का बयान ठीक ईरान के तर्ज पर है। सब कुछ ठीक वैसा ही जैसा ईरान के मामलों में हुआ है या हो रहा है। अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमला किया तो ईरान ने अमेरिका पर मिसाइलें दागने की जगह अपने पड़ोसी देशों पर ही हमले आरंभ कर दिए क्योंकि उसकी मिसाइलें अमेरिका तक पहुंच ही नहीं सकती हैं। ऐसे में वह सऊदी अरब, कुवैत, कतर, दुबई, बहरीन, ओमान जैसे देशों पर हमले कर रहा है। ठीक वैसे ही जैसा की बासित कह रहे हैं कि बिना सोचे समझे मिसाइलें दागेंगे। यानी जो जो ईरान कर रहा है और जैसे जैसे कर रहा है, वैसा ही पाकिस्तान करेगा।
यहाँ उल्लेखनीय है कि बासित अपने मन से ऐसी बातें बोल ही नहीं सकता है। वह पाकिस्तानी सेना और वहां की ‘इस्टैब्लिशमेंट’ के इशारे पर बोल रहे हैं। वे वही कह रहे हैं जो वहां के जनरलों के दिमाग में चल रहा है। ऐसे में यह डराने वाला सच है कि पाकिस्तान की टॉप पढ़ी-लिखी क्लास भी अब ‘जिहादी नैरेटिव’ का इस्तेमाल कर रही है। वे भारत को एक ‘प्रॉक्सि थिएटर’ की तरह देखते हैं। बासित ने जिस तरह 26/11 जैसे हमलों को दोहराने की बात कही है, उससे साफ है कि उनके दिमाग में आज भी आतंकवाद ही बसा है। बासित ने तो यहां तक कह दिया कि ‘अल्लाह जानता है कि पाकिस्तान क्या करेगा, पर दुनिया को जान लेना चाहिए कि हम भारत को नहीं छोड़ेंगे’.
अब कोई पूछे कि अगर अमेरिका ने पाकिस्तान पर हमला किया तो पाकिस्तान भारत पर हमला क्यों करेगा? क्या भारत अमेरिका का सहयोगी देश है? क्या वर्तमान हालात ऐसे हो गए हैं जब मान लिया जाए कि पाकिस्तान और अमेरिका या पाकिस्तान और इसराइल के रिश्ते इतने बिगड़ गए हैं कि ये देश पाकिस्तान पर हमला करने वाले हैं? या आने वाले दिनों में पाकिस्तान को परमाणु हथियारों से मुक्त करने के लिए ये देश पाकिस्तान पर हमला करेंगे ही? या क्या भारत और अमेरिका-इसराइल इतने क़रीबी देश हो गए हैं जिसमे पाकिस्तान भारत पर हमले करके अमेरिका को ब्लैकमेल करने की सोच रहा है? अगर उपरोक्त परिस्थितियाँ बन गई हैं तो फिर तो पाकिस्तान के अस्तित्व पर ही संकट के बादल हैं। यह एक नए ध्रुवीकरण के संकेत हैं। अब तक तो यही माना जा रहा था कि पाकिस्तान अमेरिका के करीब है। शायद यही कारण है कि जब भारत ने पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिंदूर के तहत हमला किया तो पाकिस्तान को बचाने के लिए अमेरिका न सिर्फ़ आगे आया, वरन् उसके फील्ड मार्शल को तीन तीन बार वाशिंगटन बुलाकर दुलारा भी। दोनों के बीच सहयोग की बातें हुईं, बलूचिस्तान में कनीजों को निकालने की बातें हुई। अमेरिका ने ना सिर्फ पाकिस्तान को भारत की मार से बचाया वरन्, पाकिस्तान को इंटरनेशनल मोनेटरी फण्ड (आईएमएफ) से लोन भी दिलाया। आर्थिक सहायता भी बढ़ाई। आज भी पाकिस्तानी फील्ड मार्शल या पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ अमेरिका के ही तलवे चाटते नज़र आ रहे हैं। हालांकि यह अलग बात है की आज पाकिस्तान की हालत इतनी ख़राब हो गई है की उसकी कोई पूछ दुनिया में नहीं रह गई है। दूसरे देश अब भीख भी नहीं दे रहे हैं। सैन्य समझौता करने वाला सऊदी अरब भी पाकिस्तान को आँखें दिखा रहा है और अपने पैसे वैसे ही माँग रहा है जैसे संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) माँग रहा है।ऐसे में सवाल है की आख़िर इन सबके बाद भी पाकिस्तान के पूर्व उच्चायुत अब्दुल बासित अमेरिका-इजरायल के डर से बिना किसी भड़कावे के भारत को गीदड़ भभकी देते क्यों दिखाई दिए हैं? ‘सूट-बूट’ पहनकर कूटनीति की बातें करने वाले बासित अब सरेआम टीवी पर आतंकियों वाली भाषा क्यों बोल रहे हैं?
आज पाकिस्तान जिस कंगाली और बेबसी के दौर से गुजर रहा है, वहां ऐसे बयान सिर्फ उनकी ‘फ्रस्ट्रेशन’ दिखाते हैं। अमेरिका और इजराइल के सामने घुटने टेकने वाला पाकिस्तान अपनी जनता को खुश करने के लिए भारत को डराने की नाकाम कोशिश कर रहा है।पर भारत पहले ही साफ कर चुका है कि वह अब चुप बैठने वाला देश नहीं है। अगर पाकिस्तान ने कोई भी हिमाकत की, तो उसे घर में घुसकर मारा जाएगा। मारा ही नहीं जाएगा, भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में ऐसा करके दिखाया भी है। और तब जब अमेरिका और इसराइल पाकिस्तान पर हमला करेंगे तब भारत ने भी अगर पाकिस्तान पर हामला कर दिया तो पाकिस्तान का क्या होगा, आसानी से समझा जा सकता है। वैसे भी अमेरिका के लिए ईरान में ज़मीनी हमला करना कठिन है, पर भारत की तो पाकिस्तान से लंबी सीमा है और भारत के लिए ज़मीनी हमला करना ज़्यादा कठिन भी नहीं है। ईरान के मामले में तो रूस ईरान का साथ दे भी रहा है, पर भारत के मामले में रूस पाकिस्तान का साथ देगा, यह संभव नहीं दिखता। ऐसे में सोचिए, पाकिस्तान का क्या होगा अगर उसने भारत पर हमला किया तो। पर फिर से सवाल सामने है कि अगर ऐसा है तो फिर पाकिस्तान की ओर से ऐसी धमकियों का मतलब क्या है?

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