आज के दौर में बेरोजगारी एक ऐसी समस्या है जो इंसान को मानसिक रूप से तोड़ देती है। जब व्यक्ति को कहीं नौकरी की राह नहीं सूझतीतो वह तिनके का सहारा ढूंढने की कोशिश करता है। इसी मजबूरी और जरूरत का फायदा उठाने के लिए आज “प्लेसमेंट सर्विसेज” ने एक बड़े और संगठित व्यापार का रूप ले लिया है।

आजकल हर गलीनुक्कड़ पर प्लेसमेंट सर्विस की दुकानें खुल गई हैं। ये केंद्र अक्सर मध्यम वर्गीय परिवारों के युवाओं को अपना निशाना बनाते हैं। विडंबना देखिए कि इन धंधों को चलाने वाले रईस लोग अपने बच्चों को कभी इन रास्तों पर नहीं भेजतेलेकिन दूसरों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने में उन्हें जरा भी झिझक नहीं होती।

लालच का वह ‘फलों से लदा पेड़

कहते हैं कि “अंधे को क्या चाहिएदो आंखें।” ठीक उसी तरह एक बेरोजगार को सिर्फ एक अदद नौकरी की तलाश होती है। प्लेसमेंट कंपनियां बेरोजगारों की इसी भूख को पहचानती हैं। वे उनके सामने नौकरी के अवसरों से लदा हुआ एक ऐसा ‘फलों का पेड़‘ खड़ा कर देती हैंजिसे देखकर कोई भी व्यक्ति लोभ में पड़ जाए। उनकी चिकनीचुपड़ी बातें ऐसी होती हैं कि अच्छेभले समझदार इंसान भी उनके झांसे में आ जाते हैं।

फंसाने का अनोखा और मनोवैज्ञानिक तरीका

इन कंपनियों के जाल बिछाने का तरीका बेहद शातिर और चरणबद्ध होता है:

1. फ्रिज्यूमे अपलोड का चाराशुरुआत होती है “फ्री रिज्यूमे अपलोड करें और नौकरी पाएं” के विज्ञापन से। जैसे ही कोई व्यक्ति अपना बायोडाटा अपलोड करता हैवह उनकी रडार पर आ जाता है।

2. झूठी प्रशंसा का जालरिज्यूमे अपलोड होते ही आपके पास कॉल आता है। वे आपके अनुभव और काबिलियत की इतनी तारीफ करेंगे कि आपको लगेगा कि आप ही उस पद के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ हैं। असल में यह प्रशंसा सिर्फ एक झांसा होती है ताकि आप उन पर भरोसा कर सकें।

3. जरूरत का विश्लेषणये कंपनियां आपके रिज्यूमे का गहराई से विश्लेषण करती हैं ताकि आपकी कमजोरी पकड़ी जा सके। वे देखते हैं कि आप कहाँ रहते हैंआपकी पिछली सैलरी क्या थी और आप कितने ‘जरूरतमंद‘ हैं।

4. भावनाओं से खिलवाड़अगर आप दूर नौकरी कर रहे हैंतो वे कहेंगे— “अरेआप इतनी दूर जाते हैंसारा पैसा तो आनेजाने में ही खत्म हो जाता होगा। हम आपको आपके घर के पास जॉब दिलाएंगे।” अगर आपकी सैलरी कम हैतो वे कहेंगे— “आपकी काबिलियत के हिसाब से आपका अप्रेजल सही नहीं हुआ है। हम आपको आपकी मनचाही सैलरी दिलवाएंगे।

मेंबरशिप‘ के नाम पर वसूली

जब वे आपको पूरी तरह अपनी बातों के जाल में फंसा लेते हैंतब असली खेल शुरू होता है। वे कहते हैं कि आपकी प्रोफाइल तो अच्छी हैबस इसमें कुछ ‘प्रोफेशनल कमियां‘ हैं जिन्हें हमारे एक्सपर्ट्स ठीक करेंगे। इसके नाम पर वे आपसे ‘रजिस्ट्रेशन फीस‘, ‘रिज्यूमे राइटिंग चार्जेस‘ या ‘प्रीमियम मेंबरशिप‘ के नाम पर मोटी रकम वसूलते हैं।

हम दूसरों जैसे नहीं हैं

सबसे मजेदार बात तब होती है जब कोई ग्राहक उन पर शक करता है। उनके पास इसका भी रटारटाया जवाब होता है— “सरबाजार में बहुत से लोग फ्रॉड कर रहे हैंलेकिन हम उनसे अलग हैं। हमारा काम जेन्युइन है।” यह वाक्य उनके आत्मविश्वास को दिखाने का एक और तरीका होता है ताकि ग्राहक बिना डरे पैसे दे दे।

एक सबक

साल 2016 में पवन (बदला हुया  नाम और उसके दोस्त सुनहरे भविष्य के सपने लेकर दिल्ली आए थे। उन्हें उत्तम नगरद्वारका और गुरुग्राम जैसे इलाकों में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। जालसाजों ने इस तरह का माहौल बनाया कि युवाओं को सब कुछ सच लगा। यहाँ तक कि फर्जी ‘सरकारी कंपनी‘ का ऑफर लेटर भी मेल कर दिया गया। भरोसे की आड़ में पवन से 30,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक ऐंठ लिए गए। आज भी वह न्याय के लिए अदालतों के चक्कर काट रहा हैलेकिन उसका कीमती समय और पैसा बर्बाद हो चुका है।

सिस्टम और जवाबदेही पर बड़े सवाल

जैसा कि आपने सही पूछा हैआखिर इन लोगों को रजिस्ट्रेशन की अनुमति कौन देता हैक्या प्रशासन को इनसे निम्नलिखित सवाल नहीं पूछने चाहिए:

1. अनुभव का प्रमाणइन्होंने अब तक कितने लोगों को वास्तव में नौकरी दिलवाई है?

2. विशेषज्ञताक्या ये उस क्षेत्र के विशेषज्ञ हैं जिसकी नौकरियां ये बांट रहे हैं?

3. पारदर्शिताक्या इनके पास कोई ट्रैक रिकॉर्ड या ऑडिट रिपोर्ट है?

ये सेल्समैन की तरह अपने ‘प्रोडक्ट‘ (नौकरीको ऐसे पेश करते हैं जैसे 10 दिन में ही आपकी जिंदगी बदल देंगे। लेकिन हकीकत में यह केवल एक ‘प्लेसमेंट बिजनेस‘ है, ‘सर्विस‘ नहीं।

सुधार के लिए आवश्यक कदम

सख्त नियमप्लेसमेंट एजेंसियों के लिए पंजीकरण के नियम बेहद कड़े होने चाहिए।

रिफंड पॉलिसीयदि कोई एजेंसी नौकरी दिलवाने में असमर्थ रहती हैतो एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा पैसा (ब्याज सहितवापस करने का कानूनी नियम होना चाहिए।

कठोर दंडपवन जैसे मामलों में त्वरित न्याय होना चाहिए ताकि दोषियों पर भारी जुर्माना और सजा का प्रावधान हो।

अततकिसी भी प्लेसमेंट एजेंसी को पैसा देने से पहले उसकी पूरी जांचपड़ताल करें। नौकरी पाने की चाहत में अपनी मेहनत की कमाई इन ठगों को न दें। याद रखेंजो आपको घर बैठे रातोंरात आपकी उम्मीद से दोगुनी सैलरी का सपना दिखाएसमझ लीजिए कि दाल में कुछ काला है। इसलिए सतर्क रहेंजागरूक बनें। आपके संघर्ष और मेहनत की कमाई इन ठगों के लिए नहीं है।

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