सुरेश सिंह बैस शाश्वत

30 अप्रैल आयुष्मान भारत दिवस 

किसी भी राष्ट्र की वास्तविक समृद्धि उसके नागरिकों के स्वास्थ्य से मापी जाती है। जब तक समाज का हर वर्ग स्वस्थ और सुरक्षित नहीं होगातब तक विकास की गति अधूरी ही रहेगी। 30 अप्रैल को मनाया जाने वाला आयुष्मान भारत दिवस इसी विचार को साकार करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास हैजो स्वास्थ्य सेवाओं को आमजन तक पहुँचाने और उन्हें आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल का प्रतीक है।

भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में स्वास्थ्य सेवाओं की समान उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। वर्षों तक गरीब और वंचित वर्ग महंगे इलाज के कारण या तो उपचार से वंचित रह जाते थे या फिर कर्ज के बोझ तले दब जाते थे। ऐसे में आयुष्मान भारत योजना  का आरंभ एक क्रांतिकारी कदम के रूप में सामने आयाजिसका उद्देश्य सभी के लिए स्वास्थ्य” के सिद्धांत को व्यवहार में लाना है। इस योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को मुफ्त या सस्ती स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराई जाती हैंजिससे वे बिना आर्थिक चिंता के अपना इलाज करा सकें। यह केवल एक स्वास्थ्य योजना नहींबल्कि सामाजिक सुरक्षा का एक सशक्त माध्यम हैजो लाखों परिवारों को आर्थिक संकट से बचाने में सहायक बन रहा है।

आयुष्मान भारत योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह केवल उपचार तक सीमित नहीं हैबल्कि इसमें स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत किया जा रहा है। इससे लोगों को उनके निकट ही आवश्यक चिकित्सा सुविधा मिल जाती है और बड़ी बीमारियों की रोकथाम भी संभव हो पाती है। हालाँकिइस योजना की सफलता केवल उसके प्रावधानों पर निर्भर नहीं करतीबल्कि इसके प्रभावी क्रियान्वयन और जन-जागरूकता पर भी आधारित है। कई बार जानकारी के अभाव में लोग इस योजना का लाभ नहीं उठा पाते।

इसलिए यह आवश्यक है कि सरकार और समाज मिलकर इसके प्रति जागरूकता फैलाएँताकि अधिक से अधिक लोग इससे लाभान्वित हो सकें। इसके साथ हीस्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखना भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। अस्पतालों में पर्याप्त संसाधनप्रशिक्षित डॉक्टर और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करना आवश्यक हैताकि योजना का लाभ सही मायने में जनता तक पहुँच सके।

स्वास्थ्य केवल एक व्यक्तिगत आवश्यकता नहींबल्कि एक सामाजिक अधिकार है। जब समाज का हर व्यक्ति स्वस्थ होगातभी राष्ट्र की उत्पादकता और प्रगति सुनिश्चित होगी। यह योजना उस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैजो सबका साथसबका विकास” के सिद्धांत को मजबूत करता है। अंततःयह दिवस हमें यह संदेश देता है कि एक सशक्त राष्ट्र का निर्माण केवल आर्थिक विकास से नहींबल्कि स्वस्थ और सुरक्षित नागरिकों से होता है। यदि हम स्वास्थ्य को प्राथमिकता देंगेतो हम एक ऐसे भारत का निर्माण कर पाएँगेजो न केवल समृद्ध होगाबल्कि मानवीय और समावेशी भी होगा।स्वास्थ्य ही जीवन का आधार हैऔर जब यह आधार मजबूत होगातभी विकास की इमारत भी सुदृढ़ होगी।

एवीके न्यूज सर्विस

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