Ncr Today. Khabariya. New Delhi। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक साझा रणनीति बनाने के लिए बुधवार को नई दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक होने वाली है। इसी बीच, कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के आसपास ऐसे पोस्टर सामने आए हैं, जिनमें विपक्षी नेताओं पर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को लेकर “दोगलापन” (दोहरे मापदंड) अपनाने का आरोप लगाया गया है।

विपक्षी गठबंधन चुनाव में कथित गड़बड़ी को लेकर जवाबदेही की मांग करने की रणनीति पर चर्चा करने के लिए बैठक करने वाला है। हालांकि, गठबंधन की एकजुटता और इस मुद्दे पर उसके स्पष्ट उद्देश्यों को लेकर सवाल बने हुए हैं। इसको लेकर पोस्टर भी लगाए गए हैं, जिसमें तंज कसते हुए यह दावा किया गया है कि विपक्षी कैसे विभिन्न मौकों पर अपनी सुविधानुसार राजनीति करते आए हैं। उनकी जीत-हार के अनुसार आरोप-प्रत्यारोप के मानदंड भी बदल गए हैं।
एक पोस्टर पर लिखा था, “जब स्कोरबोर्ड के साथ जवाब बदल जाए। हर जीत पर जबरदस्त जश्न, हर हार पर वोट चोरी का आरोप। ईसीआई सही है या गलत? यह बस इस बात पर निर्भर करता है कि वे जीते हैं या नहीं।”
इन पोस्टरों में लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी, शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे, डीएमके सुप्रीमो एम. के. स्टालिन, कांग्रेस की सोशल मीडिया चेयरपर्सन सुप्रिया श्रीनेत, तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बच्चन और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की तस्वीरें थीं।
एक पोस्टर में अखिलेश यादव का वह बयान दिखाया गया था जिसमें उन्होंने 2017 में अपनी पार्टी की जीत पर ईसीआई की तारीफ की थी, जबकि 2022 में सपा की हार पर उन्होंने चुनाव आयोग की आलोचना की थी। पोस्टर पर लिखा था, “कितना सुविधाजनक है, पूकी!”
एक और पोस्टर में राहुल गांधी को सामान के साथ दिखाया गया है। पोस्टर पर लिखा है, “विदेशी धरती पर मस्ती में चूर, 59 दिन बिहार कैंपेन से रहे दूर। लेकिन जब जनता ने नतीजा सुनाया, तो सवाल ईसीआई पर उठाया। आए देर से, इल्जाम घड़ी पर।”
एक और पोस्टर पर लिखा था, “इडी अलायंस का दोगलापन। जीते तो ईसीआई को ताली, हारे तो ईसीआई को गाली।”
इंडी ब्लॉक की यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब विपक्ष के नेताओं ने मान लिया है कि गठबंधन के पास संसद में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए जरूरी संख्या बल नहीं है।
हालांकि, विपक्षी पार्टियां उस मुद्दे पर एकजुटता दिखाना चाहती हैं जिसे वे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता के लिए चुनौती मानती हैं।
यह बैठक कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) द्वारा एक कड़ा प्रस्ताव पास करने के एक दिन बाद हो रही है, जिसमें ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (एसआईआर) प्रक्रिया को रोकने और वोटर लिस्ट से कथित तौर पर हटाए गए वोटरों के नाम वापस जोड़ने की मांग की गई है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा है कि वे सीडब्ल्यूसी बैठक में चर्चा किए गए मुद्दों को व्यापक विपक्षी मंच के सामने उठाएंगे।
अपने राजनीतिक इतिहास और संसद के दोनों सदनों में संख्या बल की हकीकत को देखते हुए बुधवार की बैठक विपक्षी गठबंधन के लिए एक और मुश्किल परीक्षा साबित हो सकती है।
गठबंधन केंद्र में एनडीए को सत्ता से हटाने में नाकाम रहा और उसके बाद कई राज्यों में उसे झटके लगे हैं, जबकि विपक्षी एकजुटता की पहल करने वालों में से एक, जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार, अब मजबूती से भाजपा के साथ जुड़े हुए हैं।

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