NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। लगातार दो दिन से जारी मूसलाधार बारिश के कारण राजस्थान में 18 लोगों की जानें चली गईं हैं। जयपुर, चूरू, बीकानेर, श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ के निचले इलाकों में 4 से 5 फीट तक जलभराव रहा, जबकि बूंदी में मेज नदी का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंचते ही कई गांव मुख्यालय से कट गए। प्रदेश के आठ ज़िलों में रेड अलर्ट जारी किया गया है और प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक आवागमन न करने की अपील की है।
बिहार में गंगा और इसकी सहायक नदियों के उफान के चलते हालात गंभीर बने हुए हैं। मुंगेर और गयाजी में हुई भारी बारिश के कारण तेज़ बहाव में दो छोटे-पुल बह गए, जबकि औरंगाबाद के अटल बिगहा गांव में पानी घुसने से लगभग 500 घर डूब गए हैं। स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट अनुसार आपदा प्रबंधन विभाग ने नाव और एनडीआरएफ टीमें तैनात की हैं; फ़ौरन राहत के तौर पर सूखा राशन, तिरपाल और मेडिकल कैंप खोल दिए गए हैं।
गंगा-यमुना उफान पर
उत्तर प्रदेश में गंगा-यमुना उफान पर हैं। वाराणसी में जलस्तर 68.43 मीटर पहुंचने से सभी 84 घाट डूबे हुए हैं। इसके चलते गंगा आरती सहित नाव परिचालन रोक दिया गया है। प्रयागराज के बलुआघाट-बारादरी जलमग्न होने से यमुना आरती का स्थान भी बदलकर बरुआ बाबा मंदिर के पास कर दिया गया है।
मध्य प्रदेश के 25 जिलों में भारी बारिश
मध्य प्रदेश के इंदौर, ग्वालियर सहित 25 ज़िलों में भारी बारिश जारी है। जिला आपदा सेल से प्राप्त जानकारी अनुसार सिहोर और दतिया में बाढ़ से अलग-अलग हादसों में पाँच लोगों की मौत हुई है, जबकि कई सड़कें कई घंटे बन्द रहीं।
यहां हालात चुनौतिपूर्ण
भारी बारिश के चलते पहाड़ी राज्यों में हालात और चुनौतिपूर्ण बने हुए हैं। हिमाचल में 200 से ज़्यादा और उत्तराखंड में 58 सड़कें भूस्खलन से बंद हो गईं हैं। सिरमौर ज़िले के पावंटा साहिब-शिलाई एनएच-707 पर ताज़ा लैंडस्लाइड से यातायात घंटों रुका रहा, लोग जान जोखिम में डालकर मलबा पार करते दिखे।
आईएमडी के मुताबिक पूर्वी-मध्य राजस्थान, पश्चिम मध्य प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार में बहुत भारी बारिश का दौर बने रहने की आशंका है; इसके बाद 17-18 जुलाई से सिस्टम कमजोर पड़ने के आसार हैं।
सावधानी ही सुरक्षा
भारी बारिश को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है और बताया जा रहा है कि निचले या तटीय इलाकों के लोग ऊँचे स्थानों पर अस्थायी शेल्टर में रहें। अनावश्यक नदी-घाट या जलप्रपात पिकनिक न करें; तेज़ बहाव में सेल्फ़ी से बचें। बिजली के खम्भों, कच्चे मकानों और ढीली पहाड़ी ढलानों से दूर रहें। आपात स्थिति में 112 या स्थानीय कंट्रोल रूम पर सूचना दें, अफ़वाहों से बचें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्राथमिकता प्राण और आधारभूत ढाँचे बचाना है।

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