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अब तीन गुना धनराशि के साथ पंजीकरण करना होगा
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पंजीकरण न कराने पर लिफ्ट का संचालन बंद करने की कार्रवाई करेगा प्रशासन
NCR TODAY. Khabariya. Noida। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में हाउसिंग सोसायटियों में लगातार हो रही लिफ्ट फंसने, खराब होने से होने वाले हादसे रोक लगाने के लिए गौतमबुद्ध नगर डीएम ने कलेक्ट्रेट के सभागार में नोएडा व ग्रेटर नोएडा की आरडब्ल्यूए और एओए के साथ बैठक की। बैठक में डीएम ने कहा है कि लिफ्ट एवं एस्केलेटर का अधिनियम 2024 के तहत लिफ्ट का पंजीकरण कराना जरुरी था, लेकिन बड़ी संख्या में पंजीकरण नहीं कराए गए। अब तीन गुना धनराशि के साथ पंजीकरण करना होगा। अगर पंजीकरण नहीं कराया तो फिर लिफ्ट का संचालन बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।
डीएम मनीश कुमार ने कहा कि अधिनियम जनहित और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। लिफ्टों के सुचारु एवं सुरक्षित संचालन के लिए सभी स्वामियों को उत्तर प्रदेश लिफ्ट एवं एस्केलेटर नियमावली-2024 के अंतर्गत पंजीकरण कराना सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने आरडब्ल्यूए प्रतिनिधियों से अपील की कि वे अधिनियम की जानकारी अपने सोसायटी में रहने वाले लोगों को दें और लिफ्टों की नियमित जांच एवं रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दें।
सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा ने बताया कि उत्तर प्रदेश लिफ्ट और एस्केलेटर अधिनियम 2024 तथा उत्तर प्रदेश लिफ्ट और एस्केलेटर नियमावली 2024 के प्राविधानों के तहत नियमों के समय सीमा का उल्लंघन करने पर स्वामी के विरूद्ध विलंब शुल्क लागू किया जायेगा, 31 मार्च तक लिफ्ट का पंजीकरण कराने का मौका दिया गया था, लेकिन दो माह पहले पूरा हो चुका है। इसके बाद भी अब तक केवल 7702 लिफ्ट का पंजीकरण हुआ है। जबकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा में 80 हजार से अधिक लिफ्ट हैं। समय पूरा होने के बाद विलंब शुल्क के साथ लिफ्ट का पंजीकरण कराना था। पहले सात दिन में 100 रुपये प्रतिदिन, फिर सात से 15 दिन में 200 रुपये प्रतिदिन, 15 से 30 दिन में 500 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से पंजीकरण कराना था, लेकिन यह समय भी पूरा हो गया है। 30 दिन के बाद 10,000 रुपये विलंब शुल्क देना होगा।
एक दिन पहले ही सीनियर सिटीजन सोसाइटी में एक ही परिवार के 6 लोग लिफ्ट में फंस गए और करीब 45 मिनट तक यह लोग लिफ्ट में फंसे रहे। जिंन्हें पीआरवी मौके पर पहुँच और लोहे की रोड से लिफ्ट को कड़ी मशक्कत के बाद खोलकर 6 सदस्य को सुरक्षित बाहर निकाला। भवनों में लिफ्टों के खराब होने से बार-बार असुविधा हो रही है। यह मुद्दा कई लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय बन गया है, जिसके कारण प्रशासन को निर्णायक कार्रवाई करने के लिए प्रेरित किया गया है।