अजय औदीच्य
आज सुबह-सुबह मेरा जादूगर दोस्त कंधे पर झोला लटकाए भागता हुआ सा मेरे घर आया और आते ही बोला.. यार, शौचालय कहां है? मुझे जोर से लगी है। मैंने ऊपर वाले कमरे से लगे बाथरूम की ओर इशारा कर दिया। उसके शौचालय जाते ही मेरे मन में खयाल आया कि जब तक वह हल्का हो, क्यों न उसके झोले को खंगाल लिया जाए क्या पता कितने डॉलर छिपाकर रखे हों! मैंने जैसे ही झोला उठाया, उसका ‘हल्का वजन’ देख मैं चौंक पड़ा। झोले में हाथ डालते ही सबसे ऊपर जादूगर दोस्त की मास्टर डिग्री रखी मिली। हाथ और अंदर डाला तो कुछ वे फोटो मिले, जो उसकी गरीबी के दिनों में विदेशी सैर वाले थे। झोले में एक और फोटो मिला, जिसमें बाबा गोरखनाथ, स्वामी विवेकानंद और गुरु श्रीनानक देव जी आपस में धर्म-चर्चा कर रहे थे। एक वह फोटो भी मिला, जिसमें नाली में पाइप डालकर एक खोखे वाला चाय बना रहा था। जादूगर दोस्त के झोले में विदेशों से लाए गए काले धन का ब्यौरा भी रखा था और उन लोगों के बैंक खातों की लिस्ट भी, जिनमें 15-15 करोड़ रुपए भेजे गए थे। झोले में रखे दस्तावेजों को देख मेरा कौतूहल बढ़ रहा था। मैंने सोचा, क्यों न झोला पलटकर एक बार में ही सब देख लूं। झोला पलटा तो तमाम कारनामों की जानकारी लम्बी लिस्ट के तौर पर रखी देखी। साथ ही दो हजार रुपए का एक नोट भी रखा था। दस्तावेजों में नोटबंदी से टूटी कमर वाले आतंकियों के फोटो भी निकले। उन किसानों की फेहरिस्त भी रखी मिली, जिनकी आमदनी दोगुनी हो चुकी है। उन विपक्षी नेताओं की सूची भी झोले से निकली, जो जादुई वॉशिंग मशीन में धुलकर एकदम सफेद हो चुके हैं। सबसे खास लिस्ट डीजल-पैट्रोल और खाने-पीने के सामान की मिली, जिनकी साल-दर साल कीमतें कम हुई हैं। गजब बात यह है कि झोले में संदूर की एक डिबिया भी मिली, जिसमें जादूगर दोस्त का फोटो चिपका हुआ था। मैंने सोचा कि जब इतना कुछ सामान है तो इसमें केयर्स फंड का हिसाब-किताब भी रखा होगा। यकीन मानिये.. झोले में ऐसा कुछ भी नहीं था।  मैं झोले से निकले सामान को देख ही रहा था, तभी जादूगर दोस्त बाथरूम से निकलकर आ धमका।  मैं उसे देख हक्का-बक्का रह गया।  मेरा मजाक उड़ाते हुए जादूगर दोस्त बोला.. देख ले-देख ले, कितना सोना और पैसा रखा है झोले में? मैंने कौतूहलवश अपने दोस्त से पूछ ही लिया कि ये सब तूने झोले में क्यों रखा हुआ है?  मेरे सवाल पर जादूगर दोस्त के आंसू झलक उठे। बोला.. यार, वायदा किया है तो एक न एक दिन झोला लेकर जाना ही होगा। तब इन यादों के अलावा अपने साथ और क्या होगा? मैंने पूछा- ये सिंदूर की डिबिया क्यों रख रखी है? जादूगर दोस्त ने सामान समेटकर झोले में रखा और यह कहते हुए चलता बना कि सिंदूर के बारे में अब कभी मत पूछना।

लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

सभार

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