एनसीआर टुडे. नगीना। मस्जिद यस शाह नगीना के इमाम और जमीअत उलेमा-ए-हिंद नगीना के नायब जनरल सेक्रेटरी मौलाना वकील अहमद राशिदी ने अपने बयान में क़ुरबानी की अहमियत पर रौशनी डाली। मौलाना ने कहा कि ईद-उल-अज़हा का त्योहार हमें हज़रत इब्राहीम अ़लैहिस्सलाम की उस बेमिसाल क़ुरबानी की याद दिलाता है, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने प्यारे बेटे हज़रत इस्माईल अ़लैहिस्सलाम को क़ुरबान करने का इरादा किया। अल्लाह ने उनकी इस नीयत को क़बूल फरमाया और क़ुरबानी को इस्लाम का एक अहम हिस्सा बना दिया। मौलाना ने बताया कि क़ुरबानी एक इबादत है, जो सिर्फ जानवर ज़बह करने का नाम नहीं, बल्कि उसमें अल्लाह की रज़ा और बंदगी का जज़्बा होना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि क़ुरबानी करने वालों को चाहिए कि वह जानवरों के साथ नर्मी से पेश आएं और इस अमल को पूरी पाकीज़गी और एख़लास के साथ अंजाम दें। अंत में मौलाना ने लोगों से अपील की कि वह क़ुरबानी के ज़रिये जरूरतमंदों का भी ख्याल रखें, ताकि ईद की खुशियाँ सबके साथ तक़सीम की जा सकें।