रवि अरोड़ा
प्रातः स्मरणीय मोदी जी आप हम भक्तों की परीक्षा लेते हैं, यह तो हम जानते थे, मगर वक्त के साथ साथ आपकी परीक्षाएं इतनी कड़ी होती चली जाएंगी, यह किसी ने नहीं सोचा था । ताली-थाली बजाने, मोबाइल की लाइट अथवा टॉर्च जलवाने तक तो ठीक था मगर इस ससुरे ट्रंपवा को काहे हमसे पुजवा दिया? माना कि मोदी जी आप नॉन बायलॉजिकल ‘ हैं और आप पर लत्थी चढ़ी, ऊंच नीच का कोई प्रभाव नहीं पड़ता मगर हम बेचारे भक्त कहां जाएं ?
हम ठहरे सामान्य जीव, हम इतनी बेशर्मी कहां से लाएं ? हमें तो लोगबाग रोक रोक कर पूछते ही हैं किभाई ये घोड़ा चतुर घोड़ा चतुर क्या लगा रखा है। साफ साफ बताओ कि ट्रंप मोदी जी का दोस्त हैं कि नहीं ? यदि है तो तो फिर क्यों हम भारतीयों की नाक में दम किए हुए है ? एक बार में बताओ कि चीन को लाल आंख दिखानी है या उसके साथ व्यापार आगे बढ़ाना है ? पाकिस्तान दुश्मन नंबर वन है या उसके साथ हो रहा क्रिकेट मैच देखने जाना है ? हमारा दोस्त रूस पाकिस्तान और चीन से गलबहियां कर रहा है, सऊदी अरब और ईरान पाकिस्तान की गोद में जा बैठे, तुर्किए और अजरबेजान आस्तीन के सांप निकले। सारे सार्क देश हमें भाव नहीं दे रहे । आज पूरी दुनिया में एक भी देश ऐसा नहीं है, जिसे भारत अपना सच्चा दोस्त कह सके । ये सब कैसे हुआ जब मोदी जी ने पिछले ग्यारह सालों में 92 विदेशी दौरे कर 78 देशों की यात्राएं की और जनता के सैंकड़ों करोड़ रुपए फूंक डाले ? आखिर लोगों को कैसे समझाएं कि मोदी जी आप यह सब करके ही भारत को विश्व गुरू बना रहे हैं ?
हम तो इसी बात पर बलिहारे जा रहे थे कि ट्रंप ने आपको फिर अपना दोस्त कहा और 17 तारीख को आपके जन्मदिन पर फोन कर बधाई भी दी मगर अब दो दिन बाद ही ये एच 1बी वीजा की फीस 6 लाख से बढ़ा कर 88 लाख करके काहे नासपीटे ने दोस्ती के नाम पर तमाचा मार दिया ? माना मोदी जी आपका दिल बड़ा है और आप ट्रंप की बाल सुलभ शरारतों पर मुस्कुरा कर रह जाते हैं । तभी तो सीज फायर कराने संबंधी उसके दावे, पचास फीसदी टैरिफ लगाने और नशीले पदार्थ बेचने वाले देशों में हमें शुमार करने पर भी आप चुप रहते हैं मगर हम क्या करें ? हमें तो लोग बाग पूछते ही हैं कि क्या इसी खड़ूस आदमी के हमने मंदिर बनवाए थे, इसी की जीत के लिए हवन करवाए थे और देश ही नहीं विदेश में भी अबकी बार ट्रंप सरकार के नारे हमसे लगवाए थे ?बेशक हम अपने तईं प्रयास कर रहे हैं और ऊपरी आदेश के अनुरूप लोगों को समझा रहे हैं कि यह भी मोदी जी का ही मास्टरस्ट्रोक है और इसी के सहारे भारत से ब्रेन ड्रेन रुकेगा मगर अपने उन बच्चों को कैसे समझाएं तो लाखों रुपए खर्च कर कम्प्यूटर साइंस में बी टेक कर रहे हैं? उन्हें कैसे समझाएं कि अमेरिका की आईटी कंपनी की नौकरी से ज्यादा पैसा पकौड़े तलने में है ? नोटबंदी लोग भूल गए, जीएसटी की आदत पड़ गई, कोविड की बदइंतजामी को अपना नसीब और महंगाई, बेरोजगारी को पिछले जन्म का कोई पाप मान लिया मगर इस बात का क्या जवाब दें कि सारे पाप क्या हमने ही किए , इन अंबानियों और अडानियों ने कौन से पुण्य किए हैं जो देश की सारी मलाई इन्हीं के पेट में उतर रही है ? चलिए इसे भी झेल लें मगर इस ट्रंपवा का क्या करें, इसने तो हमारी बोलती ही बंद कर रखी है। मुआ आंख भी मार रहा है और घूंघट भी कर रहा है।
शास्त्र बताते हैं कि कृष्ण ने सौ अपराध होने पर अपने रिश्तेदार शिशुपाल का वध कर दिया था । कलयुग के शायद नियम शायद अलग हैं वरना 20 जनवरी को दोबारा राष्ट्रपति की शपथ लेने के बाद ट्रंप रोज़ भारत को गरिया रहा है। भारत पाक के बीच हुए संक्षिप्त युद्ध में सीजफायर की बात तो वह रोज करता ही था मगर अब कह रहा है कि मैने मोदी को 24 घंटे का समय दिया था लेकिन मोदी ने पांच घंटे में ही सीजफायर कर दिया । जहाज गिरने और हमारे भारी नुकसान जैसी उसकी बातें भी किसी गाली से कम हैं क्या ? मोदी जी आप ही नहीं हम भी मानते हैं कि आपको भगवान ने एक विशेष कार्य के लिए भेजा है , मगर वो विशेष कार्य क्या है, यह तो पता चले प्रभु । लोग पूछते हैं कि क्या रोज रोज की जलालत ही वह विशेष कार्य था तो वह तो कब का हो चुका , अब तो हमें क्षमा करवा दो । प्रभु हम सौगंध उठा कर कहते हैं कि आपके प्रति हमारा विश्वास लेश मात्र भी नहीं डिगा है मगर लोगों के करारे सवालों का सामना अब हमसे नहीं हो पा रहा । कृपया करके हमारी परीक्षाएं लेना बंद करें अथवा ढीठपने का ऐसा कोई नुस्खा हमें भी दें जिससे हम भी आपकी तरह अपनी रक्षा कर सकें। हम जानते हैं कि इसका भी कोई न कोई फार्मूला फोर्टी फोर तो आपके पास अवश्य होगा ही ।
आपके चरणों का दास, एक भक्त
सभार