Ncr Today. Khabariya. New Delhi। सुप्रीम कोर्ट ने देश में डॉग बाइट (कुत्तों के काटने) की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई है। इस क्रम में सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने के अपने फैसले को बरकरार रखा है। शीर्ष अदालत ने उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें डॉग लवर्स की ओर से स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड जैसी सार्वजनिक जगहों से आवारा कुत्तों को हटाने के पूर्व आदेश में बदलाव की मांग की गई थी। वहीं, एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट ने कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया दी है।
मेनका गांधी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हार मान ली है। उन्होंने जो नवंबर 2022 को ऑर्डर दिया था, उसमें उन्होंने ‘शेल्टर’ बनाने और ‘एबीसी शेल्टर’ बनाने के आदेश के साथ राज्यों के सचिवों को बुलाकर खास हिदायत भी दी थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर शेल्टर नहीं बनेंगे तो कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इसके बाद भी कुछ नहीं हुआ, कोई शेल्टर नहीं बना। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कह दिया कि अब आप हाई कोर्ट चले जाइए।
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि 780 जिले हैं तो 780 एबीसी शेल्टर नहीं बनाएं, लेकिन एक भी नहीं बना। अब एक भी नहीं बनाएंगे तो क्या होगा। दिल्ली में हमने बनाना तो दूर 10 एबीसी शेल्टर बंद कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने बताया कि गंगानगर शहर में कुत्तों के काटने के 1080 मामले सामने आए हैं, लेकिन सवाल यह है कि गंगानगर में आज तक एक भी एबीसी शेल्टर क्यों नहीं खोला गया।
मेनका गांधी ने कहा कि रोजाना 10500 कुत्ते हिट एंड रन में मारे जाते हैं; ऐसे में हमें इन सवालों के जवाब भी ढूंढने होंगे। अगर सुप्रीम कोर्ट ये बोल देता कि अगर एबीसी शेल्टर नहीं खोलोगे तो हम उस शहर के नगर आयुक्त को सस्पेंड कर देंगे, तो सारे एबीसी शेल्टर खोल दिए जाते। अगर वो केवल ये बोल देते हैं कि पूरे देश में केवल 16 एनजीओ हैं, जिनकी ट्रेनिंग हुई है, और 780 जिलों में सब नकली एनजीओ चला रहे हैं, तो ऐसा क्यों हो रहा है?
उन्होंने कहा कि पोलियो को निकालने में 15 साल लगे, उसके लिए सरकार ने 700 करोड़ रुपए खर्च किए हर हफ्ते…आप कुत्तों के मामलों के लेकर चलाए जा रहे पूरे प्रोग्राम में ही 700 करोड़ रुपए डाल दीजिए, फिर देखिए कितना असर पड़ता है।
उन्होंने कहा इस समस्या का समाधान कुछ इस तरह हो सकता है कि अब राज्यों को 780 एबीसी शेल्टर खोलने चाहिए और 780 एनजीओ को ट्रेनिंग दें और एक कानून ये बनाएं कि कोई एनजीओ एक से ज्यादा कॉन्ट्रेक्ट नहीं ले सकता है।
उन्होंने बताया कि चेन्नई में एक एनजीओ ने 11 कॉन्ट्रेक्ट लिए हैं। वसाई वरार में एक एनजीओ ने पांच कॉन्ट्रेक्ट लिए हैं। हरियाणा में एक-एक एनजीओ ने सात से आठ कॉन्ट्रेक्ट लिए हैं और सारे गैर-कानूनी हैं। अगर आप इन गैर-कानूनी एनजीओ को निकाल दें और उनकी जगह एनजीओ को ट्रेनिंग दे दें और हिसाब से एक एनजीओ को एक कॉन्ट्रेक्ट दे दें, तो सिस्टम सुधर जाए।

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