NCR TODAY. Khabariya. Aligarh। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के अरबी विभाग द्वारा विभाग के पूर्व प्रख्यात शिक्षक प्रो. अब्दुल बारी के निधन पर एक शोकसभा आयोजित की गई। प्रो. बारी का गत 19 अक्टूबर को अलीगढ़ स्थित उनके निवास पर निधन हो गया था।
विभागाध्यक्ष प्रो. मोहम्मद सना उल्लाह नदवी ने 1988 से प्रो. बारी के साथ अपने लंबे संबंधों को याद करते हुए उन्हें अपने शैक्षणिक जीवन के सबसे प्रेरणादायक शिक्षकों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि उमय्यद काल के राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं तथा अरबी साहित्य पर प्रो. बारी की विद्वत्तापूर्ण समझ को व्यापक रूप से सराहा गया।
प्रो. नदवी ने बताया कि उन्होंने प्रो. बारी के साथ लीबिया की एक शैक्षणिक यात्रा की थी, जहां उन्होंने उनकी विनम्रता और उदारता को नजदीक से अनुभव किया। उन्होंने उन्हें एक धर्मनिष्ठ विद्वान, कुशल शिक्षक और बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति के रूप में वर्णित किया।
प्रो. तौकीर आलम फलाही (सुन्नी थियोलॉजी विभाग) ने प्रो. बारी को एक विनम्र, ईमानदार और समर्पित शिक्षक के रूप में याद किया, जिन्होंने अपने सहयोगियों और विद्यार्थियों का सदा धैर्य और स्नेहपूर्वक मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि प्रो. बारी की ईमानदारी और शैक्षणिक अनुशासन ने हर उस व्यक्ति पर गहरा प्रभाव छोड़ा जो उनके साथ काम करता था।
प्रो. गुलाम मुरसलीन (पूर्व अध्यक्ष, पश्चिम एशियाई अध्ययन विभाग) और प्रो. उबैदुल्लाह फहद (पूर्व अध्यक्ष, इस्लामिक अध्ययन विभाग) ने भी प्रो. बारी की यादें साझा कीं और विद्यार्थियों के प्रति उनके मार्गदर्शन और करुणा की प्रशंसा की।
प्रो. अबू सुफयान इस्लाही ने उन्हें एक उदार हृदय वाले विद्वान के रूप में याद किया, जो समुदाय की स्थिति को लेकर हमेशा चिंतित रहते थे। वहीं प्रो. मोहम्मद समी अख्तर फलाही ने विभाग के कुशल संचालन और अनेक शोधार्थियों के मार्गदर्शन में उनकी भूमिका को रेखांकित किया।
वीमेन्स कॉलेज के प्राचार्य प्रो. मसूद अनवर अल्वी ने प्रो. बारी को काव्यात्मक श्रद्धांजलि अर्पित की और 1976 से जुड़ी अपनी स्मृतियाँ साझा करते हुए उनकी विनम्रता और आध्यात्मिकता पर प्रकाश डाला।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्रो. सैयद कफील अहमद कासमी (पूर्व डीन, कला संकाय) ने कहा कि यद्यपि प्रो. बारी ने अलीगढ़ से बाहर शिक्षा प्राप्त की, लेकिन अपने चरित्र, विद्वता और सेवा के माध्यम से वे एएमयू परिवार का अभिन्न अंग बन गए। उन्होंने 17 एम.फिल. और 21 पीएच.डी. शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया, जिनमें भारत और विदेश के विद्यार्थी शामिल थे। प्रो. बारी को उनकी विद्वता, विनम्रता और साहित्य एवं सुगंध के प्रति प्रेम के लिए सदैव याद किया जाएगा।
शोकसभा का समापन डॉ. अशहद जमाल नदवी द्वारा दिवंगत आत्मा की शांति के लिए की गई दुआ से हुआ।
प्रो. बारी अपने पुत्रों मोहम्मद मुबाशिर, मोहम्मद मुंजिर, और मोहम्मद मुनव्वर, तथा दामाद मसूद को छोड़ा है।