NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। कट्टरपंथ के माध्यम से अपना नेटवर्क फैलाने की आतंकी गुटों की मुहिम को खत्म करने के लिए एनआईए जम्मू कश्मीर में राज्य जांच एजेंसी – एसआईए की मदद कर रही है। एनआईए अपने विशेष इनपुट राज्य एजेंसी से साझा कर रही है और कई महत्वपूर्ण मामलों को निपटाने का जिम्मा राज्य जांच एजेंसी के पास ही है। एक अधिकारी ने कहा हम नई रणनीति के तहत राज्य बलों और राज्य स्तर की एजेंसियों को मजबूत बनाने और अपनी विशेषज्ञता उनसे साझा करने पर फोकस कर रहे हैं। सुरक्षा बल से जुड़े सूत्रों ने कहा , आतंकी गतिविधियों का तरीका तेजी से बदल रहा है और एजेंसियां बदलते ट्रेंड को गंभीर चुनौती मानकर लगातार काउंटर रणनीति पर काम कर रही हैं।
आतंकवादी संगठन ”स्वयंभू” यानी खुद से कट्टरपंथी बन चुके व्यक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं
एजेंसियों के अनुसार अब आतंकवादी संगठन ”स्वयंभू” यानी खुद से कट्टरपंथी बन चुके व्यक्तियों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा नहीं दिखते। इससे उन्हें पहचानना और ट्रैक करना बेहद कठिन हो गया है। हालांकि एनआईए ने आईएसआईएस सहित कई अन्य मामलों में कट्टरपंथी साजिश से जुड़े मामलों को ट्रैक किया है। इसलिए एसआईए को भी पिछले ट्रेंड और उनका विश्लेषण करते हुए कई स्थानीय मामलों की जांच में मदद की गई है। सूत्रों ने कहा, जांच के दौरान जम्मू-कश्मीर के अंदर और बाहर काम करने वाले आतंकी संचालकों के तौर–तरीके में बड़ा बदलाव देखा गया है। वे अब ऐसे लोगों को चुन रहे हैं, जिनका पहले कभी आतंकवाद या किसी आपराधिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं रहा। यह नई रणनीति सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक चुनौती खड़ी कर रही है।
सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कट्टर बनाया जा रहा
अधिकारियों का कहना है कि पाकिस्तानी हैंडलर अब पुराने आतंकियों को दोबारा इस्तेमाल करने से बच रहे हैं, क्योंकि उन पर निगरानी काफी बढ़ गई है। इसके बजाय वे युवाओं, पढ़े-लिखे पेशेवरों और ऐसे लोगों को टारगेट कर रहे हैं जो पुलिस या एजेंसियों के रिकॉर्ड में नहीं हैं। उन्हें सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से कट्टर बनाया जा रहा है। फिर उन्हें छोटे-छोटे मॉड्यूल की तरह काम करने के लिए प्रेरित किया जाता है। अधिकारियों ने कहा कि इन लोगों को ट्रैक करने के लिए स्थानीय तंत्र को मजबूत करना और जवाबदेह बनाना जरूरी है। इसी रणनीति के तहत जांच से लेकर ऑपरेशन तक में स्थानीय फोर्सेज और जाँच एजेंसियों पर भरोसा बढ़ाया गया है। जबकि केंद्रीय एजेंसियां मार्गदर्शक और सहयोगी की भूमिका में है। ज़्यादा गंभीर मामलों का नेतृत्व ही केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं।