NCR TODAY. Khabariya. New Delhi।  ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद देश में 40 दिनों के शोक का ऐलान किया गया है। इसके साथ ही ईरान ने पवित्र स्थल इमाम रजा दरगाह पर काला झंडा फहराया गया। वहीं भारत में ईरानी दूतावास में वहां के झंडे को आधा झुका दिया गया है। साथ ही दुनिया के तमाम देशों से अमेरिका और इजरायल के इस हमले की कड़ी आलोचना करने के लिए कहा।

खामेनेई की मृत्यु के बाद भारत स्थित ईरानी दूतावास ने अपना झंडा आधा झुका दिया।ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भारत में इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान का दूतावास, अमेरिका और इजरायल की यहूदी सरकार के क्रूर और आपराधिक हमलों के बाद अयातुल्लाह सैय्यद अली खामेनेई की शहादत पर गहरा दुख और शोक जाहिर करता है।”
ईरानी दूतावास ने दुनिया के तमाम देशों से अपील की है कि वे इस खुलेआम जुर्म की कड़ी निंदा करें और कानून की अनदेखी और हमले के सामने चुप न रहें।”
ईरानी दूतावास ने आगे कहा, “बेशक, इस माफ न किए जा सकने वाले जुर्म के गंभीर नतीजे सीधे तौर पर गुनहगार अमेरिकी सरकार और कब्जा करने वाली यहूदी सरकार को भुगतने पड़ेंगे, जो इसके सभी नतीजों के लिए पूरी तरह जिम्मेदार होंगे। खुद पर गर्व करने वाला देश ईरान हमेशा की तरह ताकत, हिम्मत और पक्के इरादे के साथ अपने नेक रास्ते पर चलता रहेगा। देश के मामलों में किसी भी तरह की रुकावट की इजाजत नहीं दी जाएगी। शहीदों का पवित्र खून ईरानी लोगों के अपनी आजादी, इज्जत और ऊंचे आदर्शों की रक्षा करने के इरादे को और मजबूत करेगा।”
खामेनेई की मौत के बाद ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका और इजरायल को बदला लेने की चेतावनी दी है। सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी और खामेनेई के सलाहकार अली लारीजानी ने कहा, “अमेरिकियों ने ईरानी लोगों के दिल में छुरा घोंपा है और हम उनके दिल में छुरा घोपेंगे।” उन्होंने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ और जवाबी कार्रवाई का वादा करते हुए कहा, “हमारी सेना का रिएक्शन और भी ज्यादा मजबूत होगा। उन्हें पता होना चाहिए कि वे बस हमला करके भाग नहीं सकते।”
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और न्यायपालिका के प्रमुख वाला एक टेम्पररी लीडरशिप स्ट्रक्चर जल्द ही बन जाएगा। ईरान ने इलाके के नेताओं को भरोसा दिलाया है कि वह उनके साथ जंग नहीं चाहता, लेकिन मिडिल ईस्ट के देशों में अमेरिकी बेस को टारगेट करना जारी रखेगा। लारीजानी ने कहा, “यह हमेशा के लिए साफ कर देना चाहिए कि अमेरिकी ईरान को डरा-धमका नहीं सकते।”

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