The President, Smt. Droupadi Murmu attends the inaugural session of the Global Conference on the Role of Women in Agri Food System (GCWAS-2026), in New Delhi on March 12, 2026.

मुर्मु ने कृषि-खाद्य प्रणाली में महिलाओं की अग्रणी भूमिका को सराहा

NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुरूवार को कहा कि महिलाएं फसल की बुवाई, कटाई, प्रसंस्करण और विपणन से लेकर मछली पालन, पशुपालन और डेयरी जैसे क्षेत्रों में अथक परिश्रम करती हैं।
सुश्री मुर्मु आज यहां ‘कृषि-खाद्य प्रणाली में महिलाओं की भूमिका’ पर आयोजित वैश्विक सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने अपने संबोधन में कृषि अर्थव्यवस्था में महिलाओं के अमूल्य योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस अवसर पर उन्होंने महिला किसानों की सफलता की कहानियों पर आधारित पुस्तक ‘वूमेन एडं एग्रीकल्चर – शेपिंग द फ्यूचर टुगेदर’ का विमोचन भी किया। उन्होंने पद्मश्री से सम्मानित महिला किसानों जैसे राहीबाई सोमा पोपरे (सीड मदर) और रंगम्माल पापम्माल के उदाहरण देते हुए महिलाओं को कृषि जगत की वास्तविक शक्ति बताया।
सशक्तिकरण के सरकारी प्रयासों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि केंद्र सरकार ने 06 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 03 करोड़ महिलाएं पहले ही यह मुकाम हासिल कर चुकी हैं। उन्होंने ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना की सफलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तकनीक के माध्यम से महिलाएं अब खेती को आधुनिक बना रही हैं।
वित्तीय समावेशन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जन धन योजना के 56 प्रतिशत खाते और मुद्रा लोन के 68 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं। राष्ट्रपति ने बजट 2026-27 में घोषित ‘शी-मार्ट’ पहल की भी सराहना की, जो ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों के लिए हर जिले में रिटेल आउटलेट उपलब्ध कराएगी।
राष्ट्रपति ने कृषि शिक्षा और नवाचार में बेटियों की बढ़ती भागीदारी पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि राज्य कृषि विश्वविद्यालयों में छात्राओं की संख्या अब 50 से 60 प्रतिशत तक पहुँच गई है। अमूल के ‘सरलाबेन ऐप’ जैसे तकनीकी नवाचारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि एआई और डिजिटल तकनीक से महिलाएं न केवल खेती बल्कि उद्यमिता के क्षेत्र में भी ऊंचाइयों को छू रही हैं। उन्होंने वैश्विक समुदाय से अपील करते हुए कहा कि वे सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए कृषि सहित हर क्षेत्र में ‘जेंडर-इंक्लूजन’ को प्राथमिकता दें ताकि पृथ्वी को एक संवेदनशील और सामंजस्यपूर्ण स्थान बनाया जा सके।
सम्मेलन का आयोजन ट्रस्ट फॉर एडवांसमेंट ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज, इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च, कंसल्टेटिव ग्रुप फॉर इंटरनेशनल एग्रीकल्चरल रिसर्च और प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैरायटीज एंड फार्मर्स राइट्स अथॉरिटी ने मिलकर किया है। तीन दिवसीय इस सम्मेलन का मकसद खेती में महिलाओं की भूमिका के बारे में बात करना है।

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