NCR TODAY. Khabariya. Webvarta. Patna। महागठबंधन ने बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान से दो सप्ताह पहले बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव को औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया।
इसके साथ ही, विकाशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के संस्थापक मुकेश सहनी को उप मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित किया गया और यह भी कहा गया कि सरकार बनने पर समाज के अन्य वर्गों से भी उप मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे।
हालांकि, विपक्षी गठबंधन की तरफ से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि महागठबंधन के सत्ता में आने पर कुल कितने उप मुख्यमंत्री होंगे।
तेजस्वी यादव का नाम घोषित करके महागठबंधन के घटक दलों ने अपने अंतर्विरोधों को समाप्त करने और एकता का संदेश देने का प्रयास किया है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने महागठबंधन के घटक दलों के प्रमुख नेताओं के संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में तेजस्वी के नाम की घोषणा की। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ पर्यवेक्षक गहलोत ने कहा कि तेजस्वी यादव के नाम की घोषणा से जुड़ा निर्णय कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की सहमति से लिया गया है।
पटना के एक होटल में आयोजित संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने कहा, “हमने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी जी से परामर्श के बाद, साथ ही सभी सहयोगी दलों की सहमति से तेजस्वी यादव जी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने का निर्णय लिया है।”
उन्होंने यह भी कहा कि अगर ‘इंडिया’ गठबंधन सत्ता में आता है, तो मुकेश सहनी उप मुख्यमंत्री होंगे।
गहलोत ने यह भी कहा कि बिहार की सामाजिक संरचना के मद्देनजर सहनी के अलावा समाज के अन्य वर्गों से भी उप मुख्यमंत्री बनाए जाएंगे, हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि महागठबंधन की सरकार बनने पर उसमें कितने उप मुख्यमंत्री होंगे।
समर्थकों के बीच ‘सन ऑफ मल्लाह’ के नाम से मशहूर सहनी निषाद जाति से आते हैं। निषाद बिहार में अति पिछड़े वर्ग की श्रेणी में आते हैं।
कांग्रेस के कुछ नेताओं ने यह मांग भी दोहराई कि यदि महागठबंधन सत्ता में आता है, तो किसी मुस्लिम या दलित नेता को उपमुख्यमंत्री बनाया जाए।
गहलोत ने राजद नेता तेजस्वी की तारीफ करते हुए कहा, “तेजस्वी एक नौजवान हैं, जिनका लंबा भविष्य है। जनता हमेशा उन्हीं के साथ रहती है जिनमें प्रतिबद्धता और ईमानदारी होती है। पिछली बार इन्होंने जो रोजगार के वादे किए थे, उन्हें निभाने की दिशा में काम किया।”
उन्होंने कहा, ‘राहुल गांधी जी और इन्होंने (तेजस्वी) ने मिलकर जो यात्रा (वोटर अधिकार यात्रा) की थी उसका बहुत असर हुआ है।आने वाले वक़्त में राहुल जी भी आएंगे और प्रियंका जी भी बिहार आएंगी।’
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) को यह स्पष्ट करने चुनौती दी कि मुख्यमंत्री पद के लिए उसका चेहरा कौन है?
उन्होंने दावा किया, ‘‘महाराष्ट्र में कहा गया कि एकनाथ शिंदे के चेहरे पर चुनाव लड़ा जाएगा और बाद में किसी और को मुख्यमंत्री बना दिया, यही बात यहां (बिहार) लागू हो रही है।’ मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित किए जाने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा, ‘‘यह हमारे लिए कोई बड़ा मुद्दा नहीं था, लेकिन चूंकि मीडिया में कई तरह की अटकलें चल रही थीं, इसलिए हमने इसे स्पष्ट करना जरूरी समझा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘महागठबंधन ने जो भरोसा मुझ पर जताया है, उसके लिए मैं सभी दलों का आभारी हूं। यह भरोसा बिहार की जनता का भी है। अब हमारा एक ही लक्ष्य है 20 साल पुरानी निकम्मी सरकार को उखाड़ फेंकना।’’
राजद नेता ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि 20 साल के शासन और 11 साल की मोदी सरकार के बावजूद बिहार देश का सबसे गरीब राज्य बना हुआ है। न उद्योग हैं, न रोजगार। बिना घूस के कोई काम नहीं होता। अफसर मंत्री से ज्यादा ताकतवर हो गए हैं और जनता की आवाज दबा दी गई है। तेजस्वी ने राजग पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘‘‘इनके पास न कोई विजन है, न ब्लूप्रिंट। ये लोग हमारी योजनाओं की नकल करते हैं। हमने पेंशन 1500 रुपए करने की बात कही, तो नीतीश कुमार ने 1100 रुपए देने की घोषणा कर दी।’’ उन्होंने अपने इस वादे को दोहराया कि राज्य के जिन परिवारों में सरकारी नौकरी नहीं है, उनमें एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी। साथ ही जीविका कम्युनिटी मोबलाइजर को 30,000 रुपए और जीविका ‘दीदी’ को 2,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। उन्होंने वादा किया कि महागठबंधन की सरकार बनते ही सभी संविदा कर्मियों को स्थायी किया जाएगा।
उनका कहना था कि वह मुख्यमंत्री बनने या सरकार बनाने के लिए नहीं बल्कि बिहार को बदलने के लिए काम कर रहे हैं।
तेजस्वी यादव ने दावा किया, ‘‘भाजपा नीतीश जी के साथ अन्याय कर रही है। अमित शाह कई बार कह चुके हैं कि नीतीश जी मुख्यमंत्री नहीं होंगे। अगर भाजपा में इतना आत्मविश्वास है तो वह अपने मुख्यमंत्री उम्मीदवार का नाम क्यों नहीं बताती? नीतीश जी की खराब सेहत का फायदा उठाकर उनके अपने ही लोग पार्टी को कमजोर कर रहे हैं।’’ उन्होंने राजग पर तंज कसते हुए कहा, ‘हमारा तो संयुक्त संवाददाता सम्मेलन भी हो गया, लेकिन हम लोग नीतीश कुमार के साथ जो राजग में अन्याय हो रहा है, वो देख रहे हैं। राजग का एक भी संयुक्त संवाददाता सम्मेलन नहीं हुआ है, न ही संयुक्त रूप से उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया है। हम कह रहे हैं कि वो नीतीश कुमार को दोबारा मुख्यमंत्री नहीं बनाएंगे। अमित शाह ने तो ये संदेश भी दे दिया है। हमेशा आप मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित करते हैं लेकिन इस बार आप घोषणा क्यों नहीं कर रहे।’’
कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा, “हमने अपनी ओर से नेतृत्व का चेहरा घोषित कर दिया है। अब यह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की जिम्मेदारी है कि वह यह बताए कि अगर वह सत्ता में आती है तो मुख्यमंत्री कौन बनेगा।”
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि राजग विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ेगा, लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा, यह विधायक दल तय करेगा। इस बयान को कई लोग इस रूप में देख रहे हैं कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अब बिहार में अपनी पार्टी का मुख्यमंत्री देखना चाहती है। यह एकमात्र हिंदी भाषी राज्य है जहां अब तक भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं रहा है।
इधर, राजग ने ‘इंडिया’ गठबंधन की इस घोषणा पर तंज कसते हुए कहा कि एकजुटता दिखाने की कोशिशों के बावजूद, गठबंधन के भीतर दरारें साफ नजर आ रही हैं। भाजपा ने महागठबंधन के संवाददाता सम्मेलन के दौरान लगाए गए उस पोस्टर की तस्वीर अपने ‘एक्स’ हैंडल पर साझा की, जिसमें तेजस्वी यादव की बड़ी तस्वीर थी, लेकिन विपक्षी गठबंधन के किसी अन्य नेता की तस्वीर नहीं थी।
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा, “दलित और अति पिछड़े वर्ग राहुल गांधी की वजह से ‘इंडिया’ गठबंधन को वोट देंगे। पोस्टर में उनकी तस्वीर होनी चाहिए थी। भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य जैसे सहयोगियों की तस्वीरें भी पोस्टर में शामिल की जानी चाहिए थीं।”
वहीं, केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने कहा, “हमारा चुनाव प्रचार पूरे जोर पर है, मेरी आवाज रैलियां करते-करते बैठ गई है, लेकिन ‘इंडिया’ गठबंधन के नेता अभी तक कमरे से बाहर नहीं निकले हैं।”
जनता दल (यू) के प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें “लॉलीपॉप थमाया गया एक नाराज़ बच्चा” कहा जा सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तेजस्वी ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में प्रचार अभियान की कमान संभाली थी, तब गठबंधन को “भारी पराजय” का सामना करना पड़ा था।