आरएसएस के बयान पर निशाना साधा

NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। कांग्रेस नेता और कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने मंगलवार को विनायक दामोदर सावरकर को भारत रत्न देने की मांग की कड़ी आलोचना की। उन्होंने तर्क दिया कि उनके विचार में जिसने ‘भारत के खिलाफ काम किया’ वह देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान का हकदार नहीं है।
श्री खरगे ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए इस मांग की आलोचना के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स का सहारा लिया। उन्होंने सवाल किया कि अंग्रेजों से बार-बार माफी मांगने वाले श्री सावरकर को राष्ट्रीय स्तर पर क्यों सम्मानित किया जाना चाहिए।
मंत्री ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की सेलुलर जेल का जिक्र करते हुए कहा कि हालांकि दशकों तक हजारों स्वतंत्रता सेनानी वहां कैद रहे लेकिन केवल कुछ ही लोगों ने दया याचिकाएं दायर की और श्री सावरकर ने सबसे अधिक याचिकाएं दायर की थीं।
श्री खरगे ने 1929 से 1947 के बीच ब्रिटिश सरकार से सावरकर को मिलने वाली मासिक पेंशन पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उन्होंने इस राशि में वृद्धि की मांग भी की थी। उन्होंने आरएसएस से ब्रिटिश शासन के खिलाफ श्री सावरकर के ठोस योगदान के दस्तावेजी साक्ष्य पेश करने को भी कहा।
अपनी पोस्ट में, कांग्रेस नेता ने भारत छोड़ो आंदोलन के प्रति श्री सावरकर के विरोध की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस आजाद हिंद फौज का संगठित कर रहे थे, तब श्री सावरकर भारतीयों को अंग्रेजी सेना में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित कर रहे थे।
श्री खरगे ने ब्रिटिश शासन के तहत मुस्लिम लीग के साथ सरकार बनाने के हिंदू महासभा के फैसले पर भी सवाल उठाया। उन्होंने वैचारिक मुद्दों को भी रेखांकित किया, जिनमें द्वि-राष्ट्र सिद्धांत पर सावरकर के विचार, गौ पूजा और राष्ट्र को ‘मातृभूमि’ के बजाय ‘पितृभूमि’ के रूप में वर्णित करना शामिल था। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में निष्कर्ष निकाला कि उन्हें भारत रत्न देना एक ‘मास्टरस्ट्रोक’ होगा।
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी आरएसएस प्रमुख भागवत के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने ‘संघ की 100 साल की यात्रा – नए क्षितिज’ नामक दो दिवसीय व्याख्यान श्रृंखला में कहा था कि श्री सावरकर को सम्मानित करने से खुद भारत रत्न का कद बढ़ेगा। श्री भागवत ने स्पष्ट किया कि वह पुरस्कार पर निर्णय लेने वाली किसी भी संस्था का हिस्सा नहीं हैं लेकिन उन्होंने कहा कि अवसर मिलने पर वह इस मामले को उठाएंगे।
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई, 1883 को हुआ था। एक कवि, लेखक और समाज सुधारक श्री सावरकर को अंग्रेजों द्वारा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की सेलुलर जेल में कैद किया गया था, जिसे उनके समर्थक अक्सर स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उनके बलिदानों के प्रमाण के रूप में उद्धृत करते हैं।

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