Ncr Today. Khabariya. New Delhi। कांग्रेस ने कहा है कि इंडिया गठबंधन के 23 विपक्षी दलों तथा एक निर्दलीय सांसद ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाते हुए उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
कांग्रेस महासचिव (संगठन) के. सी. वेणुगोपाल ने शुक्रवार को सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर 28 जून को मुख्य न्यायाधीश को भेजा गया यह पत्र सार्वजनिक किया। पत्र में कहा गया है कि सामान्य परिस्थितियों में न्यायपालिका को इस प्रकार पत्र लिखने की आवश्यकता नहीं पड़ती, लेकिन देश का लोकतंत्र गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है, इसलिए विपक्ष को यह असाधारण कदम उठाना पड़ा है।
इसमें कहा गया है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की आधारशिला हैं और यदि चुनावी प्रक्रिया प्रभावित होती है तो जनता की वास्तविक इच्छा के अनुरूप सरकार बनने का संवैधानिक सिद्धांत कमजोर पड़ जाता है।
पत्र में कहा गया है कि 2014 के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर लगातार सवाल उठे हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों में सत्ता पक्ष के प्रति नरम और विपक्ष के प्रति कठोर रवैया अपनाया है। साथ ही चुनाव आयोग की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी चिंता व्यक्त करते हुए इस संबंध में लंबित संवैधानिक मुद्दों पर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया गया है।
विपक्षी दलों ने पत्र में बिहार विधानसभा चुनाव से पहले कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को जल्दबाजी में शुरू की गई और दोषपूर्ण प्रक्रिया बताया है। पत्र में कहा गया है कि दस्तावेज आधारित इस प्रक्रिया से गरीबों, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, प्रवासी श्रमिकों तथा अन्य वंचित वर्गों के लाखों मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित होने की आशंका पैदा हुई है।
इसमें आरोप लगाया गया है कि प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता का अभाव रहा, समय-समय पर दिशा-निर्देश बदले गए और कई स्थानों पर प्रशासनिक अव्यवस्था भी देखने को मिली।
दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों को लेकर भी पत्र में सवाल उठाए गए हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) आधारित मतदान प्रणाली पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा कराई जानी चाहिए तथा आवश्यकता पड़ने पर मतपत्र प्रणाली बहाल करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।
विपक्षी दलों ने मुख्य न्यायाधीश से आग्रह किया है कि एसआईआर प्रक्रिया को तत्काल स्थगित कराया जाए और इसे ऐसे समय कराया जाए, जब संबंधित राज्य में विधानसभा चुनाव कम से कम पांच वर्ष दूर हों, ताकि प्रत्येक मतदाता का घर-घर जाकर निष्पक्ष सत्यापन किया जा सके।
पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि सीबीआई, ईडी और एनआईए जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए किया जा रहा है।
इसमें कहा गया है कि लोकतंत्र में जनता का अंतिम भरोसा न्यायपालिका पर होता है और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं में लोगों का विश्वास बनाए रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप आवश्यक है। श्री वेणुगोपाल ने पत्र सार्वजनिक करते हुए लिखा कि इसे पारदर्शिता के हित में जारी किया गया है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि उच्चतम न्यायालय चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, जवाबदेही और मतदाताओं के विश्वास की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।

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