मुख्य ढांचे के शिलान्यास की तैयारी, पीएम कर सकते हैं लोकार्पण

Ncr Today. Khabariya. Mathura-Vrindavan। धर्म और आध्यात्म की नगरी वृंदावन में विश्व के सबसे ऊंचे देवालय चंद्रोदय मंदिर का निर्माण कार्य एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गया है। मंदिर का दक्षिणी भाग (साउथ ब्लॉक) पूरी तरह बनकर तैयार हो गया है, जिसके लोकार्पण की भव्य तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसके साथ ही अब मुख्य मंदिर के निर्माण के लिए आधारशिला रखने की योजना बनाई जा रही है। यह भव्य मंदिर न केवल स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना होगा, बल्कि इसकी ऊंचाई ऐतिहासिक कुतुब मीनार से भी लगभग तीन गुना अधिक होगी। कुतुब मीनार की ऊंचाई जहां 73 मीटर है, वहीं 70 मंजिला चंद्रोदय मंदिर 212 मीटर ऊंचा होगा। मंदिर प्रबंधन इस ऐतिहासिक अवसर को यादगार बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करने की योजना बना रहा है।
संभावना जताई जा रही है कि यदि प्रधानमंत्री का आगमन होता है, तो वे साउथ ब्लॉक का लोकार्पण करने के साथ ही दुनिया के सबसे ऊंचे मुख्य मंदिर की आधारशिला भी रखेंगे। अक्षयपात्र फाउंडेशन के 110 एकड़ परिसर में बन रहे इस मंदिर के सबसे ऊपरी तल पर भगवान श्रीराधाकृष्ण विराजमान होंगे, जहां से पूरे ब्रजमंडल का विहंगम दृश्य देखा जा सकेगा। तकनीकी और शिल्प की दृष्टि से यह मंदिर आधुनिकता और परंपरा का संगम है। खजुराहो शैली और आधुनिक डिजाइन के मिश्रण से बन रहे इस मंदिर की अनुमानित लागत अब करीब 1400 करोड़ रुपये आंकी गई है। मंदिर का पूरा ढांचा 511 पिलरों पर टिका होगा, जो 9 लाख टन तक का वजन सहन करने में सक्षम हैं। मंदिर परिसर के भीतर ही गोवर्धन, बरसाना और वृंदावन के प्रतिरूप बसाए जाएंगे। साथ ही, मंदिर के चारों ओर यमुना की एक कृत्रिम धारा प्रवाहित होगी, जिसके तट पर भक्त पूजन कर सकेंगे।
वर्तमान में बनकर तैयार हुआ साउथ ब्लॉक खुद में किसी अजूबे से कम नहीं है। इसकी ऊंचाई 251 फीट है और यह 11 मंजिला इमारत है, जिसके दूसरे तल पर भगवान श्रीश्री वृंदावन चंद्र का मंदिर स्थापित है। हालांकि इस महापरियोजना का शिलान्यास 2014 में हुआ था और पहले इसे 2018 तक पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन अब इसकी समय सीमा 2028 तक बढ़ाई गई है। मुख्य मंदिर की आधारशिला अगले महीने रखे जाने की उम्मीद है, जिसके बाद अगले आठ वर्षों में इसे पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मंदिर भविष्य में वैश्विक पर्यटन और आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।

 

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