नरेश दीक्षित
ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद इंदिरा गाँधी की हत्या की आशंका जताये जाने लगी थी। इस ऑपरेशन से एक वर्ग की धार्मिक भावनाएं आहत हुई। जिसे कुरेद-कुरेद ख़ालिस्तानी सिखों के एक बड़े वर्ग को भारत सरकार के खिलाफ भड़काने लगे। अप्रत्यक्ष रुप से कांग्रेस के खिलाफ। प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के क्लोज सुरक्षा मे दो सिख गार्ड भी थे। एक दिन IB प्रमुख ने इंदिरा के सामने एक फाइल रखी। जिसमें लिखा था कि इन दोनों सिख गार्डो से आपको खतरा हो सकता है। इन्हे तत्काल प्रधानमंत्री सुरक्षा से हटा कर इनके मूल कैडर मे वापस भेज दिया जाना चाहिये।
इंदिरा ने फाइल पढ़ी। IB प्रमुख के तरफ मुस्कुराते हुए देख फाइल पर एक नोट लिखा। मै पूरे भारत वर्ष की प्रधानमंत्री हूँ। मै खुद को इस आधार पर अपने नागरिकों से अलग नही रख सकती। इससे देश और उस आहत हुए समुदाय के बीच अविश्वास की खाई और चौड़ी हो जाएगी। मै ये नही कर सकती इसके लिए चाहें मेरी जान ही क्यों न चली जाये।
30 अक्टूबर 1984 को भुनेश्वर के परेड ग्राउंड मे इंदिरा ने एक भाषण मे कहा ‘मैं आज यहां हूं। कल शायद यहां न रहूं। मुझे चिंता नहीं मैं रहूं या न रहूं। देश की चिंता करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। मेरा लंबा जीवन रहा है और मुझे इस बात का गर्व है कि मैंने अपना पूरा जीवन अपने लोगों की सेवा में बिताया है। मैं अपनी आखिरी सांस तक ऐसा करती रहूंगी और जब ‘मैं मरूंगी तो मेरे ख़ून का एक-एक क़तरा भारत को मजबूत करने में लगेगा’
इस भाषण के ठीक 18 घंटे बाद ही 31अक्टूबर 84 को इंदिरा गाँधी की उन्ही दो गार्डो द्वारा हत्या कर दी गई। आज पंजाब एक शांत और समृद्ध राज्य है। जिसे इंदिरा गाँधी और सरदार बेअंत सिंह ने अपने खून से सिंचा।
आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी का बयान एक डरे हुए आदमी का बयान लगा। जिसको अपने देश के किसानों से डर लगता है। जो अपने देश के एक राज्य से भाग खड़ा होता है। देश एक डरपोक, कायर और आत्ममुग्ध इंसान के हाथों मे है। जो सिर्फ TV पर लाफाजी कर सकता है। प्रधामंत्री जी आज आपने इस पद की गरिमा को शर्मिन्दगी से भर दिया है। हमें आप पर तरस आता है।
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