राजेश बैरागी
यह प्रश्न सैकड़ों करोड़ रुपए का हो चुका है कि उत्तर प्रदेश राज्य का अगला मुख्य सचिव कौन होगा? 31 जुलाई को सेवानिवृत्त होने जा रहे वर्तमान मुख्य सचिव को एक वर्ष का सेवा विस्तार देने की मांग वाला राज्य सरकार का पत्र दिल्ली दरबार को प्राप्त हो चुका है परंतु सेवा विस्तार की राह इतनी आसान होती तो मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह नोएडा आने के बहाने दिल्ली दरबार में इतनी बार मत्था क्यों टेक रहे होते।
उत्तर प्रदेश के शीर्ष प्रशासनिक पद मुख्य सचिव को पाने और अक्षुण्ण बनाए रखने की जंग दिल्ली में दस्तक दे रही है। देश के दो शीर्ष औद्योगिक घरानों में अपनी अपनी पसंद के अधिकारी को अगला मुख्य सचिव नियुक्त कराने के लिए चल रही प्रतियोगिता ने इस जंग को और भी दिलचस्प बना दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से निकटता के चलते मुख्य सचिव पद हासिल करने वाले मनोज कुमार सिंह पूरे समय समूची कैबिनेट के लिए एक चुनौती बने रहे हैं। सबसे ताकतवर मंत्री माने जाने वाले नंद गोपाल गुप्ता नंदी से उनकी अदावत तो जगजाहिर ही है। उनके अपने समकक्ष और मातहत अधिकारियों से भी ज्यादा अच्छे रिश्ते नहीं बताये जाते हैं। बीते दिनों मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह और प्रमुख सचिव उद्योग आलोक कुमार के बीच तीखी नोंकझोंक लखनऊ सचिवालय से दिल्ली तक चर्चा का विषय बनी हुई है। बताया गया है कि दोनों शीर्ष अधिकारियों के बीच यह नोंकझोंक मुख्यमंत्री के समक्ष हुई और उन्हें हस्तक्षेप करना पड़ा। मंत्री नंदी की तबादला सूची को दबाकर बैठने के कारण पिछले दिनों लखनऊ के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में तूफान आ चुका है। इस सबके बावजूद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें सेवा विस्तार देने के आग्रह वाली चिट्ठी केंद्र को भेजी है। सामान्य स्थितियों में राज्य सरकार के आग्रह को केंद्र द्वारा बिना किसी किंतु परंतु के स्वीकार कर लिया जाता है। परंतु इस बार मामला थोड़ा अलग है। मुख्य सचिव की नियुक्ति को लेकर देश के दो शीर्ष औद्योगिक घराने भी पूरी दिलचस्पी ले रहे हैं। सूत्रों की मानें तो गौतम अदाणी वर्तमान मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह को ही आगे भी इस पद पर बनाए रखने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। मुख्य सचिव पद के अगले दावेदार एस पी गोयल को मुकेश अंबानी का वरदहस्त बताया जाता है। दिल्ली दरबार में दोनों औद्योगिक घराने अपने अपने मोहरों क्षमा करें अपने अपने अधिकारियों के लिए जोर लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री के आग्रह और एक औद्योगिक टाइकून के समर्थन के बावजूद वर्तमान मुख्य सचिव को सेवा विस्तार मिलने की आश्वस्ति नहीं है। इसीलिए वे पिछले पंद्रह दिनों से किसी न किसी बहाने नोएडा ग्रेटर नोएडा आकर दिल्ली दरबार में अपनी पैरवी कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार पिछले सप्ताह उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की थी।दो बार प्रयास करने पर देर शाम को हुई मुलाकात के बाद उनका चेहरा लटका हुआ बताया गया। इस सप्ताह अवाडा कंपनी को जमीन दिलाने के बहाने मुख्य सचिव फिर नोएडा आए परंतु लक्ष्य दिल्ली दरबार ही था। हालांकि अभी तक उन्हें ग्रीन सिग्नल मिला नहीं है।

सभार (नेक दृष्टि) www.nekdristi.com

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