NCR TODAY. Khabariya. New Delhi। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से एक ऐसी नीति बनाने के लिए कहा है ताकि भारत में अपराध करने के बाद विदेशी नागरिक जमानत मिलने के बाद न्यायिक प्रक्रिया से भाग नहीं सके।
शीर्ष अदालत ने धोखाधड़ी के एक मामले में आरोपी नाइजीरियाई नागरिक जमानत मिलने के बाद फरार होने के मामले में केंद्र को यह निर्देश दिया।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने अपने फैसले में कहा है कि ‘एक ऐसी नीति की आवश्यकता पर है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि देश में अपराध करने वाले विदेशी नागरिक ‘न्याय से भाग न सकें। पीठ ने पिछले साल 4 दिसंबर को झारखंड उच्च न्यायालय के मई 2022 के उस आदेश को रद्द कर दिया था जिसमें आरोपी एलेक्स डेविड को जमानत दी गई थी।
पिछले सप्ताह जब इस मामले की सुनवाई हुई तो पीठ ने कहा कि नाइजीरियाई नागरिक को देश में आपराधिक कार्यवाही का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित करने के संबंध में नाइजीरिया और भारत के बीच कोई द्विपक्षीय संधि नहीं है।
शीर्ष अदालत ने कहा कि ‘ऐसे में हम विशेष अनुमति याचिका का निपटारा कर रहे हैं, जिसमें आरोपी के जमानत रद्द करने के आदेश की पुष्टि की गई है।
हालांकि पीठ ने फैसले में कहा है कि ‘केंद्र सरकार के लिए यह विकल्प खुला छोड़ दिया गया है कि वह एक उपयुक्त नीति बनाए या आगे की कार्रवाई शुरू करे जो आवश्यक और उचित समझी जाए ताकि विदेशी नागरिक भारत में अपराध करने के बाद न्याय की राह से नहीं भाग सके।
शीर्ष अदालत द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में केंद्र सरकार बताया है कि आपराधिक मामलों के संबंध में विदेश में जांच, अनुरोध पत्र जारी करने, पारस्परिक कानूनी सहायता अनुरोध और समन, नोटिस और न्यायिक दस्तावेजों की तामील के लिए व्यापक दिशानिर्देशों होने के संकेत दिया गया। केंद्र की ओर से पेश अधिवक्ता ने पीठ के समक्ष ‘विदेश मंत्रालय के सलाहकार (कानूनी) द्वारा सॉलिसिटर जनरल को संबोधित एक पत्र पेश किया। इसमें कहा गया है कि भारत और नाइजीरिया के बीच द्विपक्षीय प्रत्यर्पण संधि के अभाव में, नाइजीरियाई अधिकारियों द्वारा अपने ही नागरिक का प्रत्यर्पण करने की संभावना नहीं है। इस पत्र में कहा गया है कि प्रत्यर्पण अनुरोध पारस्परिकता के आश्वासन के आधार पर नाइजीरिया के अबुजा स्थित भारतीय उच्चायोग को भेजा गया था ताकि संबंधित नाइजीरियाई अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए इसे प्रेषित किया जा सके।

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