सौरभ वार्ष्णेय
भारतीय संस्कृति में शक्ति और विनम्रता का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है। इसका सर्वोत्तम उदाहरण रामभक्त श्री हनुमानजी से बढ़कर कहीं नहीं मिलता। हनुमानजी के पास अपार बल, बुद्धि और विद्या होने के बावजूद कभी अहंकार नहीं आया। आज के दौर में, जब थोड़ी सी उपलब्धि भी व्यक्ति को घमंड से भर देती है, हनुमान जी का जीवन हमें विनम्रता का गहरा संदेश देता है। हनुमान जी को अष्टसिद्धि और नव निधियों का स्वामी कहा जाता है। वे पर्वत उठा सकते थे, समुद्र लांघ सकते थे और असंभव को संभव बना सकते थे। फिर भी, उन्होंने स्वयं को हमेशा भगवान राम का सेवक माना। यही कारण है कि उनकी शक्ति केवल प्रदर्शन का माध्यम नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण का प्रतीक बनी। वर्तमान समाज में अक्सर यह देखा जाता है कि जैसे ही किसी व्यक्ति को सफलता मिलती है, उसमें अहंकार आ जाता है। यह अहंकार न केवल उसके व्यक्तित्व को कमजोर करता है, बल्कि उसके संबंधों को भी प्रभावित करता है। इतिहास गवाह है कि अहंकार ने बड़े-बड़े साम्राज्यों को भी मिटा दिया, जबकि विनम्रता ने साधारण लोगों को भी महान बना दिया।हनुमान जी का चरित्र हमें यह सिखाता है कि असली महानता शक्ति में नहीं, बल्कि उस शक्ति के सही उपयोग और विनम्रता में है। जब व्यक्ति अपने सामर्थ्य को समाज की भलाई के लिए समर्पित करता है और स्वयं को दूसरों से ऊपर नहीं समझता, तभी वह सच्चे अर्थों में महान बनता है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि हम अपने जीवन में हनुमान जी के इस गुण को अपनाएं। चाहे हम किसी भी क्षेत्र में हों, यदि हमारे पास ज्ञान, पद या धन है, तो उसका उपयोग समाज के हित में करें और कभी अहंकार को अपने ऊपर हावी न होने दें। यह समझना आवश्यक है कि अहंकार क्षणिक है, जबकि विनम्रता स्थायी और प्रभावशाली होती है। हनुमान जी की तरह यदि हम भी अपनी शक्ति के साथ विनम्रता को जोड़ लें, तो न केवल व्यक्तिगत जीवन में सफलता प्राप्त करेंगे, बल्कि समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन ला सकेंगे।
न जयंती न महोत्सव यह है, महाभव्य जन्मोत्सव। हर साल  चैत्र माह की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला महापर्व है जो रामजी के सेवा में तत्पर रामदूत हनुमान जी जन्मोत्सव के रूप में पूरे देश में धूमधाम से मनता है। अब सवाल है कि जब किसी का इस पृथ्वी से अवागमन हुआ ही नहीं यानी मृत्यु लोक को भी जिसने अजय कर दिया उसकी जयंती क्यों मनाई जाये इसलिए मेरे विचार से श्री हनुमान लला का महाभव्य जन्मोत्सव मनाये तो इस रामदूत के लिए भी सही होगा।
दोहा तो यू हैं कि लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर, बज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर
हे लाल शरीर (सिंदूरी) वाले, लाल सिंदूर से शोभायमान। अरु धरि लाल लंगूर: और लाल पूंछ (लंगूर) धारण किए हुए। बज्र देह दानव दलन वज्र (अत्यंत मजबूत) के समान शरीर वाले, दानवों का नाश करने वाले। जय जय जय कपि सूर: हे वानर श्रेष्ठ (कपि) शूरवीर (सूर) हनुमान जी, आपकी जय हो, जय हो, जय।
भारतीय संस्कृति और आस्था में हनुमान केवल एक देवता नहीं, बल्कि शक्ति, भक्ति, निष्ठा और सेवा के प्रतीक हैं। समय बदलता रहा, समाज बदलता रहा, लेकिन हनुमान जी के आदर्श आज भी उतने ही सार्थक और प्रेरणादायक हैं जितने प्राचीन काल में थे।आज के दौर में जब जीवन में तनाव, प्रतिस्पर्धा और अनिश्चितता बढ़ती जा रही है, हनुमान जी का चरित्र हमें संयम और धैर्य का संदेश देता है। उन्होंने अपार शक्ति होने के बावजूद कभी अहंकार नहीं किया। यह गुण आज के समाज में अत्यंत आवश्यक है, जहाँ थोड़ी सी सफलता भी कई बार घमंड को जन्म दे देती है। हनुमान जी की सबसे बड़ी विशेषता उनकी अटूट भक्ति है। राम के प्रति उनकी निष्ठा यह सिखाती है कि जीवन में किसी उद्देश्य या कर्तव्य के प्रति समर्पण कितना महत्वपूर्ण है। आज के युवा वर्ग के लिए यह एक बड़ा संदेश है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और उस पर पूरी निष्ठा से काम किया जाए, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।साथ ही, हनुमान जी का साहस और संकटों का सामना करने की क्षमता हमें यह सिखाती है कि कठिन परिस्थितियों से भागने के बजाय उनका डटकर सामना करना चाहिए। चाहे लंका जाना हो या संजीवनी लाना—हर परिस्थिति में उन्होंने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखा।आज जब समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, तब हनुमान जी का चरित्र हमें सत्य, सेवा और परोपकार की राह दिखाता है। वे केवल शक्ति के नहीं, बल्कि बुद्धि और विवेक के भी प्रतीक हैं—”बुद्धिहीन तनु जानिकेज्” जैसी पंक्तियाँ आज भी हमें आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करती हैं। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी कि हनुमान जी केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक जीवन-दर्शन हैं। उनके आदर्शों को अपनाकर व्यक्ति न केवल स्वयं को बेहतर बना सकता है, बल्कि समाज को भी सकारात्मक दिशा दे सकता है। इसलिए, आज के आधुनिक युग में भी हनुमान जी की प्रासंगिकता अक्षुण्ण है—और शायद पहले से भी अधिक आवश्यक।
लेखक वरिष्ठ पत्रकार है

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