सौरभ वार्ष्णेय
जब-जब भारत को जरूरत पड़ी तब -तब रूस ने अपना मित्रता धर्म निभाया है। वैश्विक राजनीति के जटिल दौर में, जब विश्व शक्तियों के बीच तनाव और प्रतिस्पर्धा चरम पर है, ऐसे समय में भारत के लिए रूस का एक बार फिर भरोसेमंद साझेदार के रूप में सामने आना बेहद महत्वपूर्ण है। यह केवल कूटनीतिक संबंधों का मामला नहीं, बल्कि रणनीतिक, आर्थिक और ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ा एक व्यापक सहयोग है। ऐसे समय में जब पूरी दुनिया गैस कच्चे तेल की कमी से त्रस्त है तब 9 मार्च तक भारत का रूसी तेल आयात 5.55 करोड़ बैरल तक पहुंच गया है , जो कि खरीद नौ महीने में सबसे अधिक है।

भारत की तेल खरीद में अंगोला भी पिक्चर में आया है। उसकी सप्लाई में 255 फीसदी का भारी इजाफा हुआ है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़े तेल आयातक है। उसके कच्चे तेल के आयात का लगभग 40-50 फीसदी हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरता है।सऊदी अरब से होने वाले आयात में फरवरी के मुकाबले 38 फीसदी की कमी आई। वहीं दूसरी ओर अंगोला से होने वाली खरीद में महीने-दर-महीने के आधार पर जबरदस्त 255 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह अपने अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया। भारत की ओर से इराक से की जाने वाली खरीद में भी 73 फीसदी की कमी आई। यह घटकर 73 लाख बैरल रह गई। इसी तरह संयुक्त अरब अमीरात से होने वाली खरीद में भी 59 फीसदी की कमी आई। यह 64 लाख बैरल पर पहुंच गई। भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने हैं, जो समय-समय पर परखे गए और हर बार मजबूत होकर उभरे। शीत युद्ध के दौर से लेकर आज के बहुध्रुवीय विश्व तक, रूस ने कई अहम मौकों पर भारत का साथ दिया है। आज जब पश्चिमी देशों और रूस के बीच टकराव बढ़ा है, तब भारत ने संतुलित विदेश नीति अपनाते हुए अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दी है।
ऊर्जा के क्षेत्र में रूस की भूमिका विशेष रूप से उल्लेखनीय रही है। वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता के बीच रूस ने भारत को रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराया, जिससे देश की अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिली और आम जनता पर महंगाई का बोझ कुछ हद तक कम हुआ। यह सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक मजबूत आधार बनकर उभरा है।
रक्षा क्षेत्र में भी रूस भारत का प्रमुख सहयोगी रहा है। आधुनिक हथियारों, तकनीकी हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरा सहयोग है। चाहे वह ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना हो या एस-400 वायु रक्षा प्रणाली, रूस ने भारत की सैन्य क्षमता को सुदृढ़ करने में अहम योगदान दिया है।