संजय कुमार शर्मा
देश की राजधानी दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के जनपद गाजियाबाद में आज एक निजी अस्पताल का उद्घाटन देश की प्रथम नागरिक और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने किया। हालांकि बीते 11 साल में ऐसे मौके कम ही देखने को मिले है जब सरकारी उद्घाटन कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने बतौर मुख्य अतिथि भाग लिया हो। केंद्र में मोदी सरकार को बने 11 साल हो चुके है। बीते 11 वर्षों में वंदे भारत ट्रेन से लेकर, रैपिड रेल कोरिडोर, एनएच के हाईवें के उद्घाटन, नए संसद भवन का उद्घाटन कई योजनाओं के उद्घाटनों कार्यक्रम हुए जिनमे बतौर मुख्य अतिथि और उद्घाटनकर्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही रहे। लेकिन जब बात किसी निजी संस्थान के उद्घाटन की हो तो देश के राष्ट्रपति न केवल उपलब्ध हो जाते हैं बल्कि निजी संस्थान के पक्ष में जमकर कसीदे भी पढ़ने लगते है।
रविवार को भी ऐसा ही हुआ। यहां इंदिरापुरम में निजी अस्पताल के उद्घाटन कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान राष्ट्रपति ने अस्पताल और उसके मालिक के संबंध में जमकर कसीदे पढ़े। इतना ही नहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस अस्पताल को एक रोजगार सृजन का केंद्र बताकर प्रदेश के मुख्य द्वार पर चिकित्सा के लिए पहला केंद्र तक बता दिया। जबकि देश की राजधानी दिल्ली के नजदीक कई बड़े अस्पताल पहले से संचालित है। आज उदघाटित अस्पताल और समूह के स्वामी ने इसे किसी चैरिटेबल मुहिम के तहत अस्पताल को बनाया हो इसकी संभावना कम है। अस्पताल के स्वामी विशुद्ध रूप से व्यवसायी है, जिनका लक्ष्य केवल लाभ कमाना है। हालांकि यह बात सर्वविदित है कि उपरोक्त अस्पताल समूह के स्वामी का भाजपा सरकार और उनके नेताओं से करीबी रिश्ते है। बीते वर्षों में कई ऐसे प्रकरण देखने को मिले जब देश प्रदेश के कई मंत्री, बड़े नेता और उनके करीबी समूह के अस्पताल में उपचार के लिए भती हो चुके है।
आज के आयोजन और राष्ट्रपति द्वारा निजी अस्पताल के उद्घाटन से यह बात एक बार फिर साफ हो गई कि देश में केंद्र और राज्य सरकारें आम जन के लिए कम और व्यवसायियों के लिए अधिक काम करती है। बीते एक दशक के दौरान जनपद गाजियाबाद में दिल्ली सीमा से सटे साहिबाबाद विधानसभा के कौशांबी, वैशाली वसुंधरा और इंदिरापुरम इलाके में एक भी सरकारी हाई स्कूल, इंटर कॉलेज और सरकारी चिकित्सा केंद्र नहीं बनाए गए। इतना ही नहीं सरकार के मातहत काम करने वाले गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने सरकारी स्कूल कॉलेज और अस्पताल के आरक्षित जमीन को निजी हाथों में बेच दिया। इसके लिए प्राधिकरण के अधिकारियों ने आरक्षित भूमि का भू उपयोग तक बदल दिया।
राष्ट्रपति के आज के कार्यक्रम के बाद देश की जनता को इस बात पर विचार करने को मजबूर होना पड़ेगा की देश की सरकार निजी बिजनेसमैन के लिए है या फिर आम आदमी के लिए। बेहतर होता कि इलाके में एक बड़ा अस्पताल बनता, जिसका उद्घाटन राष्ट्रपति के कर कमलों से कराया जाता। वैसे एक बात और भी आज सिद्ध हो गई कि सरकार की मंशा सरकारी अस्पताल, स्कूल कॉलेज खोलने की कम, निजी संस्थानों के लिए अवसर प्रदान करने और उनके लिए पलक पावड़े बिछाने की अधिक है।