Ncr Today. Khabariya. Araria। बिहार के अररिया जिले के फारबिसगंज निवासी चंदन भदानी ने देश के सबसे कठिन और दुर्गम पर्वतीय ट्रेकों में शामिल श्रीखंड कैलाश की सफल चढ़ाई कर एक उल्लेखनीय उपलब्धि अपने नाम की है। समुद्र तल से लगभग 18,572 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस पवित्र शिखर तक पहुंचकर उन्होंने न केवल अपनी साहसिक क्षमता का परिचय दिया, बल्कि पूरे अररिया जिले का नाम भी गौरवान्वित किया है।
कन्हैयालाल भदानी और सरस्वती भदानी के पुत्र चंदन भादानी ने पांच रात और छह दिन की कठिन यात्रा पूरी कर हिमाचल प्रदेश स्थित श्रीखंड कैलाश शिखर तक पहुंचने का लक्ष्य हासिल किया। इस दौरान उन्होंने बर्फीले ग्लेशियरों, दुर्गम पहाड़ी रास्तों, खड़ी चट्टानों और कम ऑक्सीजन जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया।
चंदन ने बताया कि उनकी यात्रा देश के विभिन्न हिस्सों से आए ट्रेकर्स के समूह के साथ शुरू हुई। कोलकाता से दिल्ली और फिर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला पहुंचने के बाद वे कुल्लू जिले के जाओ गांव पहुंचे, जहां से वास्तविक ट्रैकिंग की शुरुआत हुई। तीन दिनों में उन्होंने लगभग 34 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई पूरी की और वापसी में भी उतनी ही दूरी तय करते हुए कुल 68 किलोमीटर का दुर्गम सफर पूरा किया।
उन्होंने बताया कि श्रीखंड कैलाश यात्रा को भगवान शिव के पंच कैलाशों में सबसे कठिन और जोखिमपूर्ण यात्रा माना जाता है। भीम द्वार, पार्वती बाग, काली टॉप और नयन सरोवर से होकर श्रीखंड महादेव तक पहुंचने वाला अंतिम पांच किलोमीटर का मार्ग सबसे चुनौतीपूर्ण होता है। इस हिस्से में लगभग 90 डिग्री की सीधी चढ़ाई, बर्फ से ढके ग्लेशियर और संकरे रास्ते यात्रियों की परीक्षा लेते हैं।
चंदन के अनुसार कई स्थानों पर यात्रियों को केवल रस्सियों के सहारे आगे बढ़ना पड़ता है। रास्ते में आने वाली बर्फीली और तेज बहाव वाली नदियों को भी रस्सियों की मदद से पार करना होता है। जरा सी असावधानी हजारों फीट गहरी खाई में गिरने का कारण बन सकती है। अत्यधिक ऊंचाई के कारण ऑक्सीजन का स्तर भी काफी कम हो जाता है, जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है। हालांकि आपातकालीन स्थिति के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था उपलब्ध रहती है।
भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था रखने वाले चंदन भादानी की यह तीसरी कैलाश यात्रा है। इससे पहले वे आदि कैलाश और मणिमहेश कैलाश की कठिन यात्राएं भी सफलतापूर्वक पूरी कर चुके हैं। धार्मिक और साहसिक यात्राओं के प्रति उनकी विशेष रुचि रही है। पिछले वर्ष उन्होंने 12 ज्योतिर्लिंगों, चार धाम, अमरनाथ और नेपाल स्थित पशुपतिनाथ धाम की यात्रा भी सफलतापूर्वक संपन्न की थी।
कठोर मौसम, जमा देने वाली ठंड और जोखिमों से भरे मार्ग को पार करते हुए श्रीखंड कैलाश की चोटी पर पहुंचकर चंदन ने तिरंगा और शिव ध्वज फहराया। इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवार, बल्कि फारबिसगंज और पूरे अररिया जिले को गर्व का अवसर दिया है।
चंदन की इस सफलता पर क्षेत्र के लोगों ने उन्हें बधाई दी है। स्थानीय नागरिकों और युवाओं का कहना है कि उनका साहस, दृढ़ संकल्प और आध्यात्मिक आस्था नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। कठिन परिस्थितियों में लक्ष्य प्राप्त करने का उनका यह जज्बा युवाओं को अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेगा।

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