Ncr Today. Khabariya. New Delhi। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा भारत स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में 25 जून को एक अहम उपलब्धि हासिल करने जा रहा है।
उस दिन रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल ( अवाक्स ) प्रणाली ‘नेत्र’ को बेंगलुरु ‘सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स’ प्रयोगशाला में अंतिम संचालन मंजूरी मिलने की औपचारिक घोषणा की जायेगी।
इस मंजूरी से देश के पहले स्वदेशी ‘एयरबोर्न सर्विलांस और कमांड-एंड-कंट्रोल प्लेटफॉर्म’ के सफल संचालन के लिए तैयार होने का पता चलता है। इससे वायु सेना की नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर और शुरुआती चेतावनी (अर्ली वार्निंग) क्षमताओं को मजबूती मिलेगी।
डीआरडीओ ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, ” एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (अवाक्स) प्रणाली नेत्र के लिए अंतिम संचालन मंजूरी (एफओसी) की घोषणा 25 जून को सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स , बेंगलुरु में की जायेगी। नेत्र जैसी स्वदेशी प्रणाली के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है।”
‘नेत्र’ जिसे वायु सेना की “आसमान में आंख” की संज्ञा दी जाती है देश की घरेलू स्तर पर डिज़ाइन और विकसित पहली अवाक्स प्रणाली है। एम्ब्रेयर प्लेटफॉर्म पर फिट की जाने वाली यह प्रणाली एक साथ कई हवाई और समुद्री लक्ष्यों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने में सक्षम है।
यह एयरक्राफ्ट व्यापक रडार कवरेज प्रदान करता है और एयरबोर्न कमांड सेंटर के रूप में काम करता है, जिससे लड़ाकू विमानों , जमीनी स्टेशनों और अन्य सैन्य संपत्तियों के बीच वास्तविक समय पर तालमेल संभव हो पाता है। यह प्लेटफॉर्म पारंपरिक ज़मीनी रडार नेटवर्क की पहुंच से परे निगरानी करके स्थिति की जानकारी को काफी बेहतर बनाता है।
नेत्र प्रणाली के वायु सेना में शामिल होने के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो जायेगा जिनके पास स्वदेशी अवाक्स क्षमताएं हैं।

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